नीति आयोग का दावा- गैर-कृषि साधनों से ज्यादा कमाई कर रहे हैं किसान

मुंबई- किसानों की अन्य साधनों से हो रही आय का आंकड़ा मिलने में दिक्कत हो रही है। इससे यह पता नहीं चल पा रहा है कि वास्तव में किसानों की आय दोगुनी हुई है या नहीं। हालांकि, किसान गैर कृषि साधनों से ज्यादा कमाई कर रहे हैं। नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने कहा, कृषि वस्तुओं की कीमतें किसी कानून द्वारा तय नहीं की जा सकतीं, क्योंकि इसके गंभीर प्रभाव हैं। यह न तो कृषि क्षेत्र और न ही व्यक्तिगत किसानों के हित में हैं।

चंद ने कहा, सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य तय किया था। इसलिए हम और अधिक प्रयास करें। इस लक्ष्य की दृष्टि से हम कहां हैं, इसके आकलन की जरूरत है। 2016 में मोदी सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा था। इसके लिए एक अंतर मंत्रालयी समिति गठित की गई थी, जो इस लक्ष्य को पाने के लिए रणनीति बनाएगी।

समिति ने सितंबर 2018 में अपनी रिपोर्ट सौंपी। पैनल की सिफारिशों को स्वीकार करने के बाद सरकार ने प्रगति की समीक्षा और निगरानी के लिए एक ‘अधिकार प्राप्त निकाय’ की स्थापना की है। चंद ने कहा, हमारे पास कई किसानों का आंकड़ा नहीं है, क्योंकि जब आप किसानों की आय की गणना करना चाहते हैं, तो आपको हर पहलू को जानना होगा।

चंद ने कहा, 2018-19 में छोटे और सीमांत किसान गैर-कृषि स्रोतों से अधिक कमाई कर रहे थे। अगर हमारे पास वह आंकड़ा होगा, तभी यह पता चलेगा कि क्या किसानों की आय दोगुनी हुई है। अगर कृषि वस्तुओं की कीमतें कानूनी रूप से तय की जा सकती हैं तो कई देश, जो किसानों को लाभकारी मूल्य देने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वे इसे कानून बना देते। कीमतें कानूनी तौर पर तय नहीं की जा सकतीं। इससे सभी तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं। इसके बहुत गंभीर प्रभाव होंगे, जो कृषि क्षेत्र या किसानों के हित में भी नहीं हैं।

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