एक साल बढ़ सकता है एमएसएमई पर लागू होने वाला भुगतान का नियम

मुंबई- सूक्ष्म, छोटे और मझोले उद्योगों को अब 45 दिन में भुगतान हो सकेगा। हालांकि, कारोबारियों का कहना है कि इस नियम को इस साल एक अप्रैल के बजाय अगले साल एक अप्रैल से लागू किया जाए। इससे हमें समय मिल जाएगा और लागू करने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। वित्त मंत्रालय इस सुझाव के आधार पर इस नियम को अगले साल एक अप्रैल से लागू कर सकता है।

कारोबारी संगठनों ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर इस नियम को एक साल टालने को कहा था। केंद्र सरकार ने एमएसएमई में पंजीकृत व्यापारियों के लिए 43 बी एच नियम लागू करने का फैसला किया है। 2006 में 43 बी बना था। अब इसमें एच लगा दिया गया है। इससे एमएसएमई में पंजीकृत व्यापारियों से खरीदे गए माल का भुगतान 45 दिन में करना होगा। जो पंजीकृत नहीं हैं, उनको 15 दिन में करना होगा।

अगर कोई व्यापारी 45 दिन में भुगतान नहीं करता है तो भुगतान वाली रकम को कमाई मान कर 30 फीसदी आयकर लगेगा। अगर इस रकम का अगले वित्त वर्ष में भुगतान किया जाता है तो फिर उस साल में कुल आयकर की देनदारी में इसे समाहित किया जाएगा। इसमें भी पेंच यह है कि अगर किसी व्यापारी ने 10 लाख का माल खरीदा। 7 लाख चुका दिया और 3 लाख बाकी रह गया। अगले साल अगर उसका कारोबार दो ही लाख का होता है तो फिर तीन लाख में से एक लाख उसके अगले साल समाहित करना होगा।

व्यापारियों का कहना है कि कपड़ों का कारोबार ज्यादा प्रभावित होगा। कपड़े गोदाम से निकलकर शोरूम और उसे बेचने तक में चार महीने से ज्यादा समय लग जाते हैं। ऐसे में कैसे 45 दिन में भुगतान हो सकता है? यह कारोबार पूरी तरह से आपसी मौखिक समझौते पर चलता है।

वे एमएसएमई जो पंजीकृत हैं। यह प्रावधान केवल निर्माताओं और सेवा प्रदाताओं से खरीदे गए माल या सेवा पर लागू होगा। व्यापारी से खरीदे गए माल पर लागू नहीं होगा। केवल सूक्ष्म और छोटे कारोबार पर लागू होगा।

यूपी कपड़ा उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के अध्यक्ष अशोक मोतियानी ने कहा कि नए नियम को अभी पूरी तरह से कारोबारी समझ नहीं पाए हैं। खुदरा कारोबार पहले से ही बुरी तरह प्रभावित हैं। ऐसे में इस नियम को एक साल के लिए बढ़ाने की मांग हमने वित्तमंत्री से की है।

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