डीबीटी का दिखा असर, प्रति व्यक्ति जीडीपी पहली बार दो लाख रुपये पार

मुंबई- सभी नागरिकों के लिए जीवन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और प्रत्यक्ष लाभ ट्रांसफर यानी डीबीटी के जरिये सही लोगों तक रकम पहुंचने से पहली बार प्रति व्यक्ति जीडीपी दो लाख रुपये पार हो गई है। एसबीआई रिपोर्ट के अनुसार, जीडीपी की मौजूदा कीमतों पर चालू वित्त वर्ष में यह आय 2.11 लाख रुपये हो गई है। एक दशक में सालाना 8.9 फीसदी चक्रवृद्धि दर से बढ़त हुई है। वित्त वर्ष 2011-12 में यह 72,000 रुपये थी।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-21 में सकल बचत दर 30.2 फीसदी रही है। चालू वित्त वर्ष में 32.3 फीसदी तक जाने की उम्मीद है। यह 2013-14 के बाद सबसे ज्यादा है। घरेलू वित्तीय बचत 2020-21 में 11 फीसदी से मामूली बढ़कर 2022-23 में 15.4 फीसदी रही है। भौतिक संपत्तियों में बचत की दर इसी दौरान 10.8 फीसदी से बढ़कर 12.9 फीसदी पर पहुंच गई है। इसी दौरान निवेश 28.2 फीसदी से बढ़कर 33.7 फीसदी रहने का अनुमान है।

आंकड़ों के अनुसार 2011-12 में प्रति व्यक्ति जीडीपी 72 हजार रुपये थी जो 2013-14 में 90 हजार रुपये हो गई। 2015-16 में यह बढ़कर 1.07 लाख रुपये और 2017-18 में 1.30 लाख रुपये हो गई। 2019-20 में यह रकम 1.50 लाख रुपये जबकि 2021-22 में 1.46 लाख रुपये और 2023-24 में यह 2.11 लाख रुपये को पार कर गई।

एसबीआई का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष के अंत में देश की अर्थव्यवस्था चार लाख करोड़ डॉलर को पार कर जाएगी। वित्त वर्ष 2027 में पांच लाख करोड़ डॉलर के साथ तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था होगी। उस समय 31,429 अरब डॉलर के साथ अमेरिका पहले क्रम पर, 22,291 अरब डॉलर के साथ चीन दूसरे और 5,427 अरब डॉलर के साथ भारत तीसरे क्रम पर होगा। वैश्विक जीडीपी में अमेरिका का हिस्सा 24.7 फीसदी, चीन का 17.5 फीसदी और भारत का 4.3 फीसदी हिस्सा होगा।

रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा है कि इस साल जनवरी से दिसंबर के बीच देश की विकास दर 6.8 फीसदी रहेगी। पहले यह अनुमान 6.1 फीसदी था। यह जी-20 में सबसे ज्यादा विकास दर होगी। सरकार की ओर से भारी खर्च और मजबूत विनिर्माण गतिविधियों से अर्थव्यवस्था को तेजी मिलेगी। तीसरी तिमाही में तमाम अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए विकास दर 8.4 फीसदी रही थी।

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