स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड में जोखिम, सेबी ने कहा, फंड हाउस स्पष्ट जानकारी दें

मुंबई- भारत के बाजार नियामक ने देश में एसेट मैनेजरों से निवेशकों को उनके छोटे और मिड-कैप फंडों से जुड़े जोखिमों के बारे में स्पष्ट विवरण प्रदान करने का आग्रह किया है। अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि बाजार में मंदी के दौरान छोटे और मध्यम आकार के फंड बड़े निवेश को कैसे संभालेंगे। पहले की रिपोर्टों केअनुसार, भारत का प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) इन फंडों द्वारा किए गए स्ट्रेस टेस्ट की जांच कर रहा है।

सूत्रों के अनुसार, फंडों को यह बताना होगा कि वे कितनी तेजी से बड़ी निकासी को संभाल सकते हैं, निकासी उनके पोर्टफोलियो के मूल्य को कैसे प्रभावित कर सकती हैं, और निकासी का मैनेजमेंट करने के लिए उनके पास कितनी नकदी है। कोटक म्यूचुअल फंड के हर्षा उपाध्याय का कहना है कि निवेश समितियों को तरलता के मुद्दों के बारे में पता था, लेकिन निवेशकों को नहीं पता था। इस जानकारी से निवेशक विभिन्न फंडों की तुलना कर सकते हैं।

AMFI और सेबी नियमित रूप से जोखिमों का खुलासा करने के लिए एक स्टैंडर्ड तरीका सुझाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। बड़ी रकम आने से पिछले 52 हफ्तों में निफ्टी स्मॉल कैप 250 इंडेक्स में 71% की बढ़ोतरी हुई और निफ्टी मिड कैप 100 इंडेक्स में 64% की बढ़ोतरी हुई, जो कि निफ्टी बेंचमार्क की 28% बढ़ोतरी से कहीं ज्यादा है।

उम्मीद है कि फंड अप्रैल में ये खुलासे करना शुरू कर देंगे। सार्वजनिक दस्तावेजों से पता चलता है कि म्यूचुअल फंड आम तौर पर निकासी को संभालने के लिए अपनी संपत्ति का 1% से 5% के बीच नकदी के रूप में रखते हैं, हालांकि नियामकों द्वारा कोई विशिष्ट न्यूनतम आवश्यकता निर्धारित नहीं की गई है।

किसी फंड को स्मॉल-कैप फंड कहलाने के लिए, उसे अपना कम से कम 65% पैसा स्मॉल-कैप शेयरों में लगाना होता है। शेष 35% नकद या लार्ज-कैप शेयरों में हो सकता है। मिड-कैप फंडों के लिए भी यही बात लागू होतीहै। कुछ फंडों के पास पर्याप्त नकदी नहीं है, जबकि अन्य ने अपना सारा पैसा लार्ज-कैप शेयरों के बजाय छोटे या मिडकैप शेयरों में निवेश किया है।

भारत में, स्मॉल-कैप स्टॉक वे होते हैं जिनकी कीमत 50 अरब रुपये से कम होती है, जबकि मिड-कैप शेयरों की कीमत 50 अरब से 200 अरब रुपये के बीच होती है। 144 अरब रुपये के स्मॉल-कैप फंड वाला कोटक अस्थायी रूप से फ्लो को प्रतिबंधित कर रहा है क्योंकि उनका मानना है कि तेजी सावधानी पर भारी पड़ रही है।

पिछले साल, टाटा म्यूचुअल फंड और निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड ने अपने स्मॉल-कैप फंडों में एकमुश्त निवेश लेना बंद कर दिया था।

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