जीवन में बेहतर रिटायरमेंट बिताना चाहते हैं तो इन गलतियों से बचें

मुंबई-बेहतर सेवानिवृत्ति के लिए हमें पैसों को अलग-अलग तरीके से बचाने की जरूरत होती है। साथ ही इन्हें इस तरह निवेश करें कि इन पर बेहतर रिटर्न मिले। इसे कई भाग में आप बांट सकते हैं। जैसी जरूरत, वैसा निवेश। जीवन के हर दौर में हम पैसे से जुड़ी गलतियां करते हैं। इन्हें टालकर यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि हमारा सेवानिवृत्ति जीवन तनाव मुक्त हो।

कोई भी व्यक्ति अपनी स्थिति के आधार पर सेवानिवृत्ति का प्रबंधन करने के तरीकों का पता लगा सकता है। याद रखें कि सेवानिवृत्ति की सबसे सही परिभाषा यही होती है कि जब किसी व्यक्ति की कोई आय नहीं होती है। यदि पेंशन मिलती है, तो आप भाग्यशाली हैं, क्योंकि आपके पास कुछ ऐसा है जो बहुतों के पास नहीं है। ऐसे तीन अलग-अलग आयु वर्ग हैं जब सेवानिवृत्ति अधिकांश लोगों के लिए प्राथमिकता या चिंता का कारण बन जाती है।

पहला चरण 40-60 वर्ष की उम्र का है, जो सेवानिवृत्ति से पहले का चरण है। इस चरण में व्यक्ति को अक्सर किसी समय पर योजना बनाने की जरूरत का एहसास होता है और पर्याप्त धन होने या न होने की चिंता होती है। यह वह चरण भी है जब कोई व्यक्ति अपने जीवन में कई वित्तीय आकांक्षाओं को पूरा करने में कामयाब होता है जैसे कि कार खरीदना, छुट्टियां बिताना, घर खरीदना आदि।

यदि आप औपचारिक रूप से नौकरी करते हैं तो संभावना है कि आप कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) या राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) का हिस्सा होंगे। इन दोनों का उपयोग आप सेवानिवृत्ति के बाद कर सकते हैं। यदि आप इस आयु वर्ग में हैं, तो उस राशि से कोई समझौता न करें, जिसके लिए आप सेवानिवृत्ति के लिए काम कर रहे हैं। इस लक्ष्य प्राप्ति के लिए जितना संभव हो उतना बचत करने का प्रयास करें। आक्रामक तरीके से जितना संभव हो उतना इक्विटी में निवेश करें, क्योंकि 10-15 वर्षों में इक्विटी के माध्यम से महंगाई को मात देने और धन सृजन की संभावना अधिक है।

आपको इसकी चिंता नहीं करनी है कि कितनी रकम बचाने की जरूरत है। आप जितना बचा सकते हैं उसे ज्यादा से ज्यादा करने की कोशिश करें और इसी लक्ष्य के लिए निवेश करें। इस दौर में चूँकि आपके अधिकांश वित्तीय लक्ष्य समाप्त हो चुके हैं, इसलिए अब पूरा ध्यान सेवानिवृत्ति पर होना चाहिए। अपने बच्चों के लिए अत्यधिक बचत करने की गलती न करें और उन्हें स्वयं अपनी देखभाल करने के लिए तैयार करें, प्रेरित करें।

इसी तरह, ऋण (डेट) और निश्चित रिटर्न माध्यमों पर ज्यादा भरोसा ना करें, क्योंकि ये आपकी पूंजी को सुरक्षित तो रखेंगे लेकिन ठीक-ठाक पैसा बनाने के लिए उचित रिटर्न नहीं दिलाएंगे। यदि आप उन लोगों में से हैं जो सेवानिवृत्ति के लिए या किराये से आमदनी के लिए दूसरे घर के बारे में सोच रहे हैं, तो ऐसा ना कर धन सृजन पर ध्यान केंद्रित करें।

दूसरा चरण सेवानिवृत्ति के पहले 10-15 वर्ष हैं। इसमें व्यक्ति को दो सामान्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पहला, आप बहुत तेजी से खर्च करते हैं या आपके पास जो कुछ है उसके प्रति आप अति रूढ़िवादी हैं। दोनों ही आपके विरुद्ध जाते हैं। इस चरण में आपका प्राथमिक उद्देश्य सेवानिवृत्ति की बचत को पूरा करना नहीं है। अपनी रकम में से एक निश्चित राशि का उपयोग करें, जो कुल रकम का चार-पांच फीसदी हो। यह आंकड़ा इस आधार पर निकाला जाता है कि कोई अति-रूढ़िवादी बैंक खाते के ब्याज से कितनी कमाई करेगा। यह आपके पास मौजूद कोष पर एक सुरक्षा प्रदान करेगा।

अपना सारा पैसा बैंक में रखने की गलती न करें और ब्याज आय से गुजारा करने की उम्मीद न करें। आपको सेवानिवृत्ति बचत को तीन-चार जगह रखना चाहिए। पहली दो जगह में इतना पैसा होना चाहिए कि आपको अगले पांच-सात वर्षों में अपने नियमित खर्चों के प्रबंधन के लिए इसकी जरूरत होगी। शेष राशि में से 50 फीसदी रकम आपको उन वित्तीय साधनों में रखना चाहिए, जिससे महंगाई को सहन करने के लिए बहुत कम इक्विटी जोखिम हो। शेष 50 फीसदी इक्विटी में निवेश करें, जहां बहुत ज्यादा रिटर्न मिल सके।

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