जी बिजनेस पर आने वाले बाजार एक्सपर्ट ऐसे लगाते थे निवेशकों को चूना

मुंबई- 25 अगस्त 2022 की बात है। बलरामपुर चीनी के शेयरों के ट्रेडिंग वॉल्यूम में एक अजीब शिफ्ट देखने को मिला। शुरुआत में इसका एवरेज करीब 35,000 शेयरों पर चल रहा था लेकिन अचानक नजारा बदल गया। 15 मिनट के भीतर 1,44,000 से अधिक शेयरों की खरीद-फरोख्त हुई।

एक हफ्ते बाद इंडियामार्ट के शेयरों में भी इसकी तरह का मामला देखने को मिला। दोपहर बाद दो बजे से 2.15 के बीच इसका ट्रेडिंग वॉल्यूम करीब 2,400 था जो अगले 15 मिनट में 36,000 शेयरों के ऊपर पहुंच गया। कंपनियों द्वारा बड़ी घोषणाओं के इर्दगिर्द इस तरह की एक्टिविटी सामान्य है लेकिन इन दोनों मामलों में ऐसा कुछ भी नहीं था। दोनों मामलों में जी बिजनस के कुछ मार्केट एक्सपर्ट्स ने शेयरों के रिकमेंड किया था।

मार्केट पर फोकस प्रोग्राम में चैनल कई एक्सपर्ट्स को बुलाता है और ट्रेडिंग आवर्स ने शेयरों के बारे में उनसे सुझाव लिए जाते हैं। अक्सर कई रिटेल इन्वेस्टर्स उनके सुझावों को मानते हुए शेयरों की खरीद-फरोख्त करते हैं। इससे कई शेयरों में काफी उतार-चढ़ाव देखा जाता है। रिटेल इन्वेस्टर्स पर अपने इसी प्रभाव का फायदा उठाते हुए जी बिजनस के कुछ स्टॉक एक्सपर्ट्स ने करोड़ों का खेल किया। लेकिन उनकी यह चाल सेबी की नजरों से बच नहीं पाई।

आठ फरवरी, 2024 को सेबी ने अपने अंतरिम आदेश में जी बिजनस पर आने वाले पांच मार्केट एक्सपर्ट्स पर रोक लगा दी। साथ ही दस अन्य लोगों और कंपनियों पर स्टॉक मार्केट्स में हिस्सा लेने पर अनिश्चित काल तक रोक लगा दी। साथ ही रेगुलेटर ने इन कंपनियों को गलत तरीके से कमाई गई कमाई को वापस करने का आदेश दिया है।

फ्रंट रनिंग को फॉरवर्ड ट्रेडिंग या टेलगेटिंग भी कहा जाता है। यह एक अनैतिक प्रैक्टिस है। इसमें ब्रोकर या इन्वेस्टर के पास पहले से ही कंपनी की गोपनीय जानकारी होती है जिसके आधार पर वह ट्रेड करता है। यह जानकारी स्टॉक कीमत को प्रभावित कर सकती है। इस मामले में घोटाले के मास्टरमाइंड निर्मल कुमार सोनी जी बिजनस पर ब्रॉडकास्ट होने से पहले ही पांच स्टॉक मार्केट एक्सपर्ट्स से स्टॉक रिकमंडेशन की जानकारी ले लेता था।

इनमें किरण जाधव, आशीष केलकर, हिमांशु गुप्ता, मुदित गोयल और सिमी भौमिक शामिल हैं। सोनी ने स्टॉक ब्रोकर्स का एक नेटवर्क बना रखा था। ये लोग स्टॉक्स को खरीद लेते थे। जैसे ही टीवी पर एक्सपर्ट्स स्टॉक खरीदने की सलाह देते थे, रिटेल इन्वेस्टर्स उन्हें खरीदने के लिए लपकते थे। इससे इन शेयरों की कीमत बढ़ जाती थी और सोनी का नेटवर्क मोटा मुनाफा काटता था। इस मुनाफे का एक हिस्सा मार्केट एक्सपर्ट्स को दिया जाता था।

सेबी ने शुरुआती जांच में पाया कि संदिग्ध एंटिटीज के ट्रेड और जी बिजनस पर गेस्ट एक्सपर्ट्स की रिकमंडेशन पर में कुछ संबंध है। इसके बाद सेबी ने इस मामले में गहन जांच की। फरवरी 2022 से दिसंबर 2022 तक किए गए ट्रेड की व्यापक जांच हुई। साथ ही सेबी ने इन लोगों और एंटिटीज के ठिकानों पर छापा मारा। इससे सेबी को ऐसे सबूत हाथ लगे जिससे दोनों के बीच संबंध स्थापित करने में मदद मिली। सेबी ने अपने आदेश में इन लोगों और एंटिटीज को तीन ग्रुपों में बांटा है।

पहली कैटगरी में सोनी, पार्थ सारथी धर, एसएएआर कमोडिटीज, मनन शेयरकॉम और Kanhya Trading Company शामिल हैं। इन्हें प्रॉफिट-मेकर्स माना गया है। यानी ऐसे लोग और एंटिटीज जो गेस्ट एक्सपर्ट्स के सुझावों पर ट्रेड से मुनाफा कमा रहे थे। दूसरे ग्रुप में नितिन छलानी, रूपेश कुमार मटोलिया, अजयकुमार रमाकांत शर्मा, एसएएआर सिक्योरिटीज इंडिया लिमिटेड और रामअवतार लालचंद चोटिया शामिल हैं।

इन्हे एनेब्लर्स नाम दिया गया है। यानी ऐसी एंटिटीज जो स्टॉक रिकमंडेशन के बारे में एडवांस जानकारी देकर गलत ढंग से प्रॉफिट-मेकर्स का साथ दे रहे थे। तीसरी कैटगरी में जी बिजनस पर आने वाले पांच गेस्ट एक्सपर्ट्स शामिल हैं। सेबी के आदेश में कहा गया है कि पांच प्रॉफिट मेकर्स ने फ्रंट रनिंग के जरिए भारी मुनाफा कमाया।

एक्सपर्ट्स रिकमंडेशन के आधार पर इन लोगों ने अनुचित तरीके से 1047 ट्रांजेक्शंस के जरिए 7.41 करोड़ रुपये कमाए। इनमें से केवल एसएएआर ने ही 4.38 करोड़ रुपये कमाए। सोनी मनन शेयरकॉम के अथॉराइज्ड सिगनेटरी और डायरेक्टर हैं।

मतोलिया और शर्मा का संबंध एसएएआर कमोडिटीज और एसएएआर सिक्योरिटीज से है। छलानी Kanhya Trading Company में अथॉराइज्ड सिगनेटरी हैं। जी बिजनस के पांच गेस्ट एक्सपर्ट्स में शामिल केलकर ने सेबी की जांच में स्वीकार किया कि वह सोनी को स्टॉक रिकमंडेशन की जानकारी देते थे और उसके बदले में उन्हें पुणे में एक दलाल के जरिए प्रॉफिट का एक हिस्सा मिलता था।

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