टाटा के पास आने से बदल गई एअर इंडिया, दो साल में हो गई महाराजा

मुंबई- साल था 2022। टाटा ने आधिकारिक तौर पर एयर इंडिया की कमान हाथों में ले ली थी। सरकारी राज में यह एयरलाइन पाई-पाई को मोहताज थी। जिस दिन यह टाटा के हाथों में गई उसी दिन से उम्‍मीदें बढ़ गईं। माना जाने लगा कि अब इसके सारे कांटे और संकट खत्‍म हो जाने हैं।

एयर इंडिया सिर्फ एक एयरलाइन नहीं है। यह लाखों लाख भारतीयों के दिलों और दिमाग में खास स्थान रखती है। यह एयरलाइन देश का गौरव रही है। इसे जिंदा रखने के लिए भारतीय टैक्‍सपेयर्स की खून-पसीने की कमाई लगती रही है। यही वजह है कि इससे एक भावनात्मक लगाव है। इन फैक्‍टर्स को ध्‍यान में रखते हुए पैसेंजर्स, कर्मचारियों और कारोबारी नजरिये से एयरलाइन के प्रदर्शन का मूल्यांकन करना जरूरी है।

हालांकि, कारोबार में पूरी तरह बदलाव की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी। लेकिन, ग्रोथ के सकारात्मक संकेत हैं। टाटा के नेतृत्व में पहले से बंद कई विमानों को वापस सेवा में लाया गया है। एयर इंडिया अब 117 विमानों का संचालन करती है, जो 50 फीसदी की बढ़ोतरी है। वहीं, एयर इंडिया एक्सप्रेस 63 विमानों का संचालन कर रही है। इस विस्तार ने नए मार्गों में विमान सेवाओं की शुरुआत की है। एयरलाइन अब कुल 84 डेस्टिनेशंस पर सेवा दे रही है। इनमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों शामिल हैं।

यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इसमें एयर इंडिया के लिए 33% और एयर इंडिया एक्सप्रेस के लिए 30% की बढ़त शामिल है। इस बढ़त ने कमाई बढ़ाने में मदद की है। पिछले दो साल में एयर इंडिया के लिए यह 249% और एयर इंडिया एक्सप्रेस के लिए 148% बढ़ी है। इसके अलावा एयर इंडिया के लिए लोड फैक्टर 85% और एयर इंडिया एक्सप्रेस के लिए 83% तक सुधरा है। इस बढ़ोतरी को अडजस्‍ट करने के लिए एयरलाइन ने एयर इंडिया में अपने कर्मचारियों की संख्या 65% बढ़ाकर 18,400 कर दी है। एयर इंडिया एक्सप्रेस में 6,200 से ज्‍यादा कर्मचारी हैं।

कंपनी के पास भविष्य के लिए महत्वाकांक्षी योजनाएं हैं। 2024 के दौरान बेड़े में कुल 68 नए विमान जोड़े जाएंगे। इसमें अतिरिक्त वाइडबॉडी विमान और पट्टे पर दिए गए विमान शामिल हैं। मौजूदा विमानों को अपडेट करने की भी योजना है।

हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ठोस वित्तीय परिणाम अभी तक निर्धारित नहीं किए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय परिचालन के संबंध में उपभोक्ता प्रतिक्रिया मिलीजुली रही है। कुछ ने चुनौतीपूर्ण अवधियों जैसे पीक फॉग सीजन के दौरान असंतोष जाहिर किया है। सुरक्षा और प्रशिक्षण प्रथाओं पर भी चिंता जताई गई है, जिस पर DGCA एक्‍शन कर रहा है।

कर्मचारियों के नजरिये से उनके लिए योजना बनाने और उन्हें संभालने के मामले में चुनौतियां रही हैं। कुछ अनुभवी कर्मियों का कॉन्‍ट्रैक्‍ट रिन्‍यू नहीं किया गया था। उनका ट्रांसफर भी अनुकूल जगह नहीं किया गया। इससे असंतोष पैदा हुआ। इन मुद्दों से निपटने के लिए प्रबंधन के दृष्टिकोण की आलोचना की गई है।

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