सुप्रीम कोर्ट ने पार्टियों के चुनावी बॉन्ड से लिए जाने वाले चंदे पर लगाई रोक  

मुंबई- सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को असंवैधानिक करार देते हुए चुनावी बॉन्ड की बिक्री पर रोक लगा दी है। इस बीच छोटे राजनीतिक दलों को चंदे के नाम पर टैक्स चोरी करने वालों पर भी इनकम टैक्स विभाग की नजर है। विभाग ने कई टैक्सपेयर्स को नोटिस थमाया है।

विभाग को शक है कि इन लोगों ने इनकम टैक्स बचाने के लिए बोगस राजनीतिक दलों को चंदा दिया है। ये ऐसे राजनीतिक दल हैं जो रजिस्टर्ड तो हैं लेकिन चुनाव आयोग ने उन्हें मान्यता नहीं दी है। सूत्रों के मुताबिक डिपार्टमेंट की ओर से ये नोटिस वित्त वर्ष 2020-21 और वित्त वर्ष 2021-22 के लिए भेजे गए हैं। दरअसल विभाग जानना चाहता है कि कहीं अंजान राजनीतिक पार्टियों को चंदा देकर टैक्स की चोरी और मनी लॉड्रिंग तो नहीं की गई है।

ये नोटिस इनकम टैक्स कानून की धारा 80जीजीसी के तहत भेजे गए हैं और ईटी ने इनमें से कुछ नोटिस देखे हैं। एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि वित्त वर्ष 2020-21 और वित्त वर्ष 2021-22 के लिए अब तक इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से करीब 5 हजार नोटिस भेजे जा चुके हैं। आने वाले दिनों में अभी और नोटिस भेजे जाएंगे। अधिकारी ने कहा कि यह चंदा 20 रजिस्टर्ड पार्टियों को दिया गया। ये ऐसे दल हैं जिन्हें चुनाव आयोग ने मान्यता नहीं दी है।

अगर कोई टैक्सपेयर किसी पॉलिटिकल पार्टी या इलेक्टोरल ट्रस्ट को चंदा देता है, तो उस पर 100% छूट का दावा कर सकता है। हालांकि इसमें शर्त है कि चुनावी चंदा टैक्सपेयर इनकम से कम होना चाहिए। अधिकारी ने कहा कि कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिनमें टैक्सपेयर्स का चंदा उनकी घोषित इनकम से मेल नहीं खाता है। शक है कि इन पार्टियों ने कुछ पैसा कैश के रूप में लौटा दिया होगा। विभाग ने ऐसे टैक्सपेयर्स को नोटिस भेजा है जिनकी इनकम और चंदे की रकम आपस में मेल नहीं खाती है।

कुछ मामलों में तो टैक्सपेयर्स ने अपनी इनकम का 80% तक हिस्सा किसी राजनीतिक दल को चंदे के रूप में दिया है। अगर कोई रजिस्टर्ड राजनीतिक दल चुनाव नहीं लड़ता है या चुनावों में क्वालीफाइंग परसेंटेज वोट नहीं ले पाता है तो उन्हे गैर-मान्यता प्राप्त माना जाता है। देश में ऐसे 2,796 राजनीतिक दल हैं।

इनकम टैक्स विभाग ने पिछले साल भी ऐसे नोटिस भेजे गए थे। इस पर टैक्सपेयर्स ने पेनल्टी और इंटरेस्ट के साथ अपडेटेड रिटर्न भरा था। अधिकारियों ने कहा कि जिस तरह नियमों को टाइट किया गया है, उससे 2023 के बाद से टैक्स चोरी करना आसान नहीं रह गया है। 2022 में सीबीडीटी ने आईटीआर-7 में बदलाव किए थे। इसे राजनीतिक दल और चैरिटेबल ट्रस्ट फाइल करते हैं। इस साल से ऐसे टैक्सपेयर्स को राजनीतिक दलों को दिए गए चंदे के बारे में अतिरिक्त जानकारी देनी होगी जिनकी इनकम 50 लाख रुपये से अधिक है।

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