2047 तक सभी तक बीमा पहुंचाने के लिए अड़चनों को कम करें कंपनियां

मुंबई। 2047 तक सभी लोगों तक बीमा पहुंचाने के लिए कंपनियों को इसमें आ रही अड़चनों को दूर करने की जरूरत है। भारतीय बीमा विनियामक  एवं विकास प्राधिकरण यानी इरडाई के चेयरमैन देबाशीष पांडा ने कहा कि उद्योग में आमूल-चूल टेक्नोलॉजी परिवर्तनों के कारण सभी के लिए एक ही जैसा बीमा अब अतीत हो गया है। ऐसे में कंपनियों को नए सिरे से इस पर विचार करना चाहिए।

एक कार्यक्रम में पांडा ने मंगलवार को कहा, अब समय आ गया है कि हम दृढ़ संकल्प करें और सामूहिक रूप से बीमा क्षेत्र में व्यवधानों को कम करें। इस प्रक्रिया में एक्चूअरी की भूमिका सर्वोपरि है। पारंपरिक भूमिकाओं से बाहर आने की जरूरत है। साथ ही इस क्षेत्र को एक अलग नजरिए  से देखने की जरूरत है। बीमा उत्पादों को डिजाइन करने और इसे आगे बढ़ाने में एक्चूअरी की भूमिका प्रमुख है।

मैक्स लाइफ इंश्योरेंस और कांतार के एक सर्वे के मुताबिक, लोगों की सबसे बड़ी चिंता इस समय मेडिकल खर्च में तेजी की है। कुछ समय पहले यह चिंता 9वें स्थान पर थी, जो अब पहले स्थान पर है। इसके साथ बच्चों की शिक्षा, उनकी शादी और फिर खुद की सेवानिवृत्ति मुख्य प्राथमिकता है। मैक्स लाइफ के एमडी प्रशांत त्रिपाठी ने कहा, बीमा के प्रति लोगों में जागरुकता बढ़ रही है।

हालांकि टर्म प्लान अभी भी लोग कम ले रहे हैं, क्योंकि प्रीमियम ज्यादा है। लोगों का रुझान पहले स्वास्थ्य और फिर जीवन बीमा पर है। बीमा लेने और इसकी जानकारी हासिल करने में महिलाएं पुरुषों के  बराबर हैं। हालांकि, सबसे ज्यादा बीमा दक्षिण भारत में और फिर पश्चिम में उसके बाद उत्तरी भारत में खरीदा जाता है।

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