भारत में बीमा की पहुंच बहुत कम, फिर भी सरकार ले रही 18 पर्सेंट जीएसटी

मुंबई- दुनिया भर में इंश्योरेंस बिजनेस के हिसाब से भारत का स्थान 10वां हो गया है। साल 2021 में भारत की बाजार हिस्सेदारी 1.78 से बढ़ कर 1.85 फीसदी हो गई थी। यही नहीं इस साल इंश्योरेंस प्रीमियम में भी 13.46 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई। लेकिन, भारत वैसे चुनिंदा देशों में शामिल है जहां बीमा प्रीमियम पर 18 फीसदी की जीएसटी (Goods and Service Tax) वसूली जाती है। इस पर संसद की एक कमेटी ने भी ऐतराज जताया है। कमिटी ने कहा है कि इंश्योरेंस प्रोडक्ट़्स पर जीएसटी को तर्कसंगत बनाने की आवश्यकता है।

बीमा क्षेत्र के नियामक आईआरडीएआई के एनुअल रिपोर्ट 2021-22 के मुताबिक भारत में बीमा का कारोबार बढ़ रहा है। साल 2020 के दौरान भारत दुनिया भर के इंश्योरेंस बिजनेस में 11वां स्थान रखता था। लेकिन साल 2021 में यह सुधर कर 10वें स्थान पर आ गया। यही नहीं, भारत की बाजार हिस्सेदारी भी साल 2020 में 1.78 के मुकाबले साल 2021 में सुधर कर 1.85 हो गई है।

भारत में साल 2021 के दौरान कुल इंश्योरेंस प्रीमियम में 13.46 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। यह भी तब जबकि रीयल ग्रोथ में 7.8 फीसदी इंफ्लेशन को एडजस्ट किया गया। इस साल दुनिया भर में इंश्योरेंस प्रीमियम में 9.04 फीसदी की ही बढ़ोतरी हुई थी। केंद्र सरकार में वित्त राज्यमंत्री रहे जयंत सिन्हा की अध्यक्षता में संसद में फाइनेंस पर एक स्थाई समिति (Standing Committee on Finance) बनी है। इसी समिती ने सिफारिश की है कि इंश्योरेंस प्रॉडक्ट, विशेष रूप से हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस पर जीएसटी को तर्कसंगत बनाया जाए।

कमिटी ने यह भी सुझाव दिया है कि सरकार की तरफ से भारतीय रिजर्व बैंक बीमा इंडस्ट्री की पूंजी जरूरतों को पूरा करने के लिए ‘ऑन- टैप बॉन्ड जारी कर सकता है, जो 40- 50,000 करोड़ रुपये पर आंका गया है। कमिटी ने अपनी सिफारिशों में कहा कि यह बात सामने आई है कि हाई जीएसटी रेट के कारण प्रीमियम की रेट ज्यादा हो जाती है।

इस समय चाहे लाइफ इंश्योरेंस की बात करें या नॉन लाइफ या जनरल इंश्योरेंस की, सभी के प्रीमियम पर जीएसटी की दर 18% है।

आईआरडीए की एनुअल रिपोर्ट 2021-22 के मुताबिक भारत में इस समय इंश्योरेंस पेनेट्रेशन यानी बीमा की पहुंच महज चार फीसदी लोगों तक ही है। लाइफ इंश्योरेंस में तो यह तीन फीसदी है जबकि नॉन-लाइफ इंश्योरेंस में तो यह एक फीसदी ही है। इसके उलट ग्लोबल एवरेज सात फीसदी है। भारत में परंपरागत तरीके से लाइफ इंश्योरेंस की भारी भागीदारी रही है।

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