पेटीएम पेमेंट बैंक- रघुराम राजन के कार्यकाल में मिला लाइसेंस, हो गया खतरा

मुंबई- पेटीएम पेमेंट्स बैंक संकट से घिर गया है। कभी वह भी समय था जब लोग मान रहे थे कि यह भारत के बैकिंग सेक्‍टर में क्रांति की अगुआई करेगा। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन ने तभी चेतावनी भी दी थी। उन्‍होंने आगाह किया था कि इनोवेटिव फर्में रेगुलेटरी बॉडीज के साथ असहज रहती हैं। आसान शब्‍दों में कहें तो उन्‍हें ज्‍यादा अंकुश पसंद नहीं होता है।

आरबीआई ने अगस्त 2013 में एक डिस्‍कशन पेपर के जरिये देश में खास तरह की बैंकिंग जरूरतों को महसूस किया था। इसी के बाद फिनटेक फर्मों को लाइसेंस जारी किए गए थे। आरबीआई ने तब कहा था कि वह यह देखना चाहता है कि फिनटेक फर्में कहां तक आगे बढ़ा सकती हैं। इन्‍हीं बैंकों में पेटीएम पेमेंट्स बैंक भी था। रघुराम राजन को अर्थजगत का जेम्‍स बॉन्‍ड कहा जाता है।

पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा उन 11 आवेदकों में शामिल थे, जिन्हें आरबीआई ने अगस्त 2015 में पेमेंट बैंक शुरू करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। पेटीएम पेमेंट्स बैंक वन97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड (ओसीएल) की यूनिट है। इसके पास पेटीएम पेमेंट्स बैंक के 49 फीसदी शेयर हैं। बाकी की हिस्‍सेदारी विजय शेखर शर्मा के पास है। गौर करने वाली बात यह है कि वोडाफोन के MPesa, आदित्य बिड़ला मनी और टेक महिंद्रा अपने बैंक लाइसेंस प्राप्त करने के बावजूद कारोबार में नहीं आए।

रघुराम राजन के हाथ में सितंबर 2013 से सितंबर 2016 के बीच केंद्रीय बैंक की कमान थी। वह आरबीआई के 23वें गवर्नर थे। अगस्त 2016 में राजन ने कहा था, ‘हम पेमेंट बैंकों पर दांव लगा रहे हैं। पेटीएम एक इनोवेटिव फर्म है। इनोवेटिव कंपनियां हमेशा रेगुलेटरों के साथ सहज नहीं होती हैं। लेकिन, हम यह देखना चाहते हैं कि वे सिस्टम को कहां आगे बढ़ाते हैं। इसलिए उनके पास भुगतान बैंक लाइसेंस है।’ तब उन्‍होंने दावा किया था, ‘कई सालों से हम कह रहे हैं कि बैंकिंग क्रांति की आवश्यकता है। क्रांति आज हम पर निर्भर करती है।’

राजन उसी कार्यक्रम में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) लॉन्च करते हुए बोले थे, ‘न कह देना सबसे आसान है। जब अनिश्चितता होती है तो ‘नहीं’ कहना आसान होता है, लेकिन ‘नहीं’ कहना सिस्टम को विकसित होने से रोकता है। कहने के लिए पसंदीदा बात यह होनी चाहिए कि प्रतीक्षा करें, हमें इसे देखना चाहिए और देखना चाहिए कि विनियमन कितना बेहतर विकसित हो सकता है।’

रिपोर्टों के अनुसार, पेटीएम के खिलाफ कई गंभीर शिकायतें हैं। इनमें मनी लॉन्ड्रिंग, बैंकिंग नियमों का उल्लंघन, हितों का टकराव, मूल कंपनी से एक हाथ की दूरी बनाए रखना और लाइसेंसिंग समझौते का उल्लंघन शामिल हैं। सॉफ्टबैंक समूह समर्थित पेटीएम पिछले दो सालों से आरबीआई के रडार पर है।

दो साल पहले आरबीआई ने पेटीएम को नए ग्राहक नहीं बनाने के लिए कहा गया था। शुरुआती मुद्दा ग्राहकों की केवाईसी के अनुपालन में कमी से जुड़ा था। कई चेतावनियों के बाद केंद्रीय बैंक ने लगातार गैर-अनुपालन और पर्यवेक्षी चिंताओं का हवाला देते हुए फिनटेक कंपनी को अपने मोबाइल वॉलेट कारोबार को बंद करने के लिए कहा।

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