पूंजीगत खर्च अगले वित्त वर्ष में 11 प्रतिशत बढ़कर 11.11 लाख करोड़ रुपये

मुंबई- वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए पूंजीगत खर्च को 11 प्रतिशत बढ़ाकर 11.11 लाख करोड़ रुपये कर दिया है। यह जीडीपी का 3.4 प्रतिशत होगा। पिछले चार वर्षों में पूंजीगत खर्च तीन गुना बढ़ाया गया है। इस बढ़ोतरी से आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में कई गुना की तेजी आई है। हमारी आर्थिक ताकत ने देश को व्यापार और सम्मेलन पर्यटन के लिए एक आकर्षक गंतव्य बना दिया है।

सीतारमण ने वित्त वर्ष 2024-25 के लिए राजकोषीय अंतर को चालू वित्त वर्ष के 5.8 प्रतिशत से संशोधित कर जीडीपी की तुलना में 5.1 प्रतिशत कर दिया है। पहले लक्ष्य 5.9 फीसदी था। वित्त वर्ष 2025-26 में इसका लक्ष्य 4.5 प्रतिशत रखा गया है। चालू वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में (अप्रैल से दिसंबर तक) राजकोषीय घाटा 9.82 लाख करोड़ रुपये या पूरे वित्त वर्ष के अनुमान का 55 प्रतिशत रहा है। पिछले दस वर्षों में टैक्स से प्राप्ति बढ़कर दोगुना हो गई है। इससे राजकोषीय घाटा को कम करने का लक्ष्य रखा गया है।

हम 2025-26 में राजकोषीय घाटे को 4.5 प्रतिशत तक कम करने के लिए मजबूती से आगे बढ़ रहे हैं। सरकार 2024-25 में दिनांकित प्रतिभूतियां जारी कर बाजार से 14.13 लाख करोड़ रुपये जुटाएगी। शुद्ध उधारी 11.75 लाख करोड़ रुपये लेने का लक्ष्य है। चालू वित्त वर्ष में 15.43 लाख करोड़ रुपये जुटाने का अनुमान है।

दिनांकित प्रतिभूतियाँ एक निश्चित परिपक्वता अवधि वाली लंबे समय की सरकारी प्रतिभूतियां हैं। आमतौर पर यह 5 से 40 वर्ष के लिए होती हैं। इस पर निवेशकों को नियमित ब्याज मिलता है। परिपक्वता पर मूल राशि वापस निवेशकों को मिल जाती है। दिनांकित प्रतिभूतियाँ लंबे समय की परियोजनाओं के वित्तपोषण और सरकारी उधार की जरूरतों को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण हैं।

बेहतर आर्थिक प्रबंधन से हमने 2014 से पहले की हर चुनौती पर काबू पाया है। यह देखने के लिए कि हम 2004 में कहाँ थे, और अब कहां हैं। इसके लिए सरकार 2014 से पहले अर्थव्यवस्था के कुप्रबंधन पर संसद में श्वेत पत्र रखेगी।

2024-25 के लिए नॉमिनल जीडीपी वृद्धि दर पहले के 11 प्रतिशत के अनुमान के मुकाबले 10.5 प्रतिशत आंकी गई है। इस आधार पर 327.72 लाख करोड़ रुपये नॉमिनल जीडीपी आंकी गई है। 2023-24 में पहले अग्रिम अनुमान में इसके 296.58 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया था।

वित्त वर्ष 2024-25 में बजट आकार 6.1 फीसदी बढ़कर 47.66 लाख करोड़ रुपये होगा। खर्च बढ़ने और निवेश एवं सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं में ज्यादा आवंटन से बजट में बढ़त होगी। उधारी के अलावा कुल प्राप्तियों का सुधारित अनुमान 27.56 लाख करोड़ रुपये रहेगा। इसमें टैक्स का हिस्सा 23.24 लाख करोड़ रुपये रहेगा। कुल खर्च का सुधारित अनुमान 44.90 लाख करोड़ रुपये है। सीतारमण ने कहा, मध्यम स्तर पर है। लोग अपनी आकांक्षाओं को आगे बढ़ाने के लिए मजबूत और सक्षम हो रहे हैं।

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