जानिए मुंबई के मोहम्मद अली रोड का इतिहास, कभी बंद नहीं होता बाजार

मुंबई- मुंबई से सटे मीरा भायंदर इलाके में 21 जनवरी की रात को राम मंदिर शोभायात्रा को निशाना बनाया गया था। मीरा रोड हिंसा (Mira Road clash) पर हिंसा के वीडियो 22 जनवरी को सोशल मीडिया पर वायरल हो गए थे। प्रशासन ने इस मामले में 23 जनवरी को बड़ी कार्रवाई करते हुए मीरा रोड पर यूपी के योगी मॉडल की तर्ज पर बुलडोजर चलाया था।

मुंबई में मीरा रोड पर सुरक्षाबलों की तैनाती के बीच शांति और अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। मुंबई में मीरा रोड के बाद बीएमसी प्रशासन ने मोहम्मद अली रोड पर भी बुलडोजर एक्शन किया है। यह मुंबई की 250 साल से अधिक पुरानी रोड है।

मुंबई की मोहम्मद अली रोड दुनियाभर में फेमस है। यह एक ऐसा इलाका है जहां पर कभी भी सन्नाटा नहीं होता है। लजीज व्यंजनों और भीड़-भाड़ के जानी जाने वाली इस रोड पर चार साल पहले अप्रैल, 2020 में सन्नाटा पसरा था। कोरोना के समय जब लॉकडाउन हुआ था तब यहां मोहम्मद अली रोड स्ट्रीट फूड बाजार भी बंद हुआ था। रमजान के महीने के बाद भी यह इलाका वीरान रहा था। इस रोड पर 400 से अधिक मांसाहारी व्यंजन के साथ 100 से अधिक मिठाईयों और पेय पदार्थों की दुकानें हैं।

खाने और पीने के शौकीन इस रोड पर जरूर जाते हैं। तब यह कहा गया है कि अप्रैल 2020 में मोहम्मद अली रोड 250 सालों में पहली बार सूनी पड़ी थी। मुंबई में बाबरी विध्वंस के बाद जब सीरियल बम धमाके हुए थे तब भी यह सड़क पर सबकुछ सामान्य रहा था। पहले के सालों में इस इलाके में ट्राम चलती थी। कहा जाता है कि मुंबई में माहिम, कुर्ला, बांद्रा, अंधेरी, जोगेश्वरी, मीरा रोड, वसई, पुणे, मालेगांव, नासिक, सांगली, सूरत, दिल्ली, हैदराबाद इत्यादि में कई समान ‘रमजान बाजार’ को जन्म दिया है, लेकिन मोहम्मद अली रोड से कोई तुलना नहीं है।

मुंबई की दक्षिण हिस्से में आने वाली मोहम्मद अली रोड अपने लजीज व्यंजनों के लिए जानी जाती है। भारत के बड़े मुस्लिम लीडर, कवि और और पत्रकार रहे मोहम्मद अली जौहर के नाम पर इस रोड का नामकरण किया गया है। मोहम्मद अली जौहर कांग्रेस के छठवें अध्यक्ष थे। मोहम्मद अली जौहर का जन्म 10 दिसंबर, 10 दिसंबर 1878 को हुआ था। उनका निधन 4 जनवरी 1931 को हुआ। कहा जाता है कि मोहम्मद अली जौहर की अपील पर बड़ी संख्या में मुस्लिम आजादी के संघर्ष से जुड़े थे। उन्हें खिलाफत सम्मेलन की बैठक में दिए गए भाषण के लिए उन्हें अंग्रेज हुकूमत ने अरेस्ट किया था। इसके बाद वह अगले दो साल तक जेल में रहे थे।

मुस्लिम बहुल इलाकों में बीएमसी की कार्रवाई पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं लेकिन बीएससी के अधिकारी के अनुसार मोहम्मद अली रोड पर जो कार्रवाई की गई है। वह अस्थायी स्टॉलों के खिलाफ है। बीएमसी के अनुसार ये स्टॉल कानूनी नीं है। इसलिए इन्हें नोटिस देने का कोई सवाल नहीं उठता है। बीएमसी ने सीधे इनके खिलाफ कार्रवाई की है। बीएमसी की दलील है कि फुटपाथ पर कब्जे से लोगों को दिक्कत हो रही थी। इसलिए बीएमसी ने इब्राहिम मर्चेंट रोड पर फुटपाथ में बाधा पैदा करने वाले अस्थायी निर्माणों और दूसरे स्टॉल को हटाया है।

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