2008 के बाद पिछले सप्ताह विदेशी निवेशकों ने निकाली सबसे अधिक रकम 

मुंबई-विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने पिछले सप्ताह 20,170 करोड़ रुपये (2.4 अरब डॉलर) के शेयर बेचे। यह 2008 की शुरुआत के बाद से विदेशी फंडों से पांचवीं सबसे बड़ी साप्ताहिक निकासी और मार्च 2020 के अंतिम सप्ताह के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक निकासी थी। कोविड के चलते FPI ने उस हफ्ते 21,951 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे और बाजार को करीब 20 फीसदी नीचे ला दिया था। 

पिछले हफ्ते की निकासी मुख्य रूप से HDFC Bank के शेयरों की बिकवाली के चलते हुई, ऐसा शेयर जिसमें FPI का निवेश सर्वोच्च स्तरों में से एक है। विदेशी निवेशकों ने HDFC Bank के शेयरों की बिकवाली लेनदार की तरफ से निराशाजनक तिमाही नतीजे और कर्ज वृद्धि को लेकर चिंता व शुद्ध ब्याज मार्जिन में गिरावट के बाद की थी। 

निजी क्षेत्र के लेनदार के नतीजे पर टिप्पणी करते हुए FPI ने 17 जनवरी को इक्विटी से 10,578 करोड़ रुपये निकाले, जो किसी एक दिन में देसी बाजारों से सबसे बड़ी निकासी रही। पिछले हफ्ते की निकासी हालांकि देसी बाजारों के इतिहास में सबसे ज्यादा निकासी में शामिल रही, लेकिन कुल मिलाकर बाजारों पर इसका असर अपेक्षाकृत सुस्त रहा। 

पिछले हफ्ते सेंसेक्स में करीब 1.2 फीसदी की गिरावट आई जब HDFC Bank का शेयर 11 फीसदी टूट गया। इंडेक्स में इसका भारांक (weighting) सबसे ज्यादा है। रिकॉर्ड बिकवाली के दौरान बाजारों में 4 फीसदी से लेकर 19 फीसदी तक की गिरावट देखी गई है।

सप्ताह की शुरुआत में खबरें आ रही थी कि चीन बेहतर नहीं करने जा रहा और ब्याज दरें हमारी उम्मीद के मुताबिक तेजी से नहीं घटने जा रही, साथ ही निवेश निकासी का दबाव रहा हो सकता है। इसके अलावा खराब नतीजों के चलते बैंकिंग क्षेत्रों ने उस शेयर में अपना भारांक घटाने पर ध्यान केंद्रित किया। लेकिन बिकवाली का सिर्फ भारत से लेनादेना नहीं था। 

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