उम्मीद से ज्यादा मजबूत वृद्धि दर्ज कर सकती है भारतीय जीडीपी- आरबीआई 

मुंबई- चालू वित्त वर्ष में भारतीय अर्थव्यवस्था उम्मीद से ज्यादा मजबूत वृद्धि दर्ज कर सकती है। इसके साथ ही सरकार और निजी क्षेत्र पूंजी निवेश पर ज्यादा जोर दे सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के एक लेख में कहा गया है कि विश्व अर्थव्यवस्था को निकट भविष्य में विकास की अलग-अलग संभावनाओं का सामना करना पड़ रहा है। एशिया के नेतृत्व वाली उभरती अर्थव्यवस्थाएं बाकी दुनिया से बेहतर प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, यह लेखकों के अपने विचार हैं। 

लेख के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था ने 2023-24 में उम्मीद से अधिक मजबूत वृद्धि दर्ज की है। यह विकास दर खपत से निवेश की ओर बदलाव पर आधारित है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर माइकल देबब्रत पात्रा के नेतृत्व वाली टीम के लेख में कहा गया है कि पूंजीगत खर्च पर सरकार का जोर निजी निवेश को बढ़ावा देना शुरू कर रहा है। लेखकों ने कहा कि भारत में संभावित उत्पादन बढ़ रहा है। वास्तविक उत्पादन इससे ऊपर है। 

वित्त वर्ष 2024-25 में व्यापक आर्थिक स्थिरता के माहौल में कम से कम 7 फीसदी की वास्तविक जीडीपी वृद्धि हासिल करनी होगी। इससे विकास की तेज रफ्तार को बनाए रखने का उद्देश्य पूरा होगा। महंगाई को अगले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही तक लक्ष्य के अंदर लाने और उसी स्तर पर उसे स्थिर करने की जरूरत है। विकास को समर्थन देने के लिए वित्तीय स्थितियों को आसान बनाते हुए महंगाई पर काबू पाना होगा। 

लेख में कहा गया है कि वित्तीय संस्थानों की बैलेंसशीट को मजबूत करने के साथ संपत्ति की गुणवत्ता में और भी सुधार करने की जरूरत है। राजकोषीय और बाहरी संतुलन के चल रहे समेकन को जारी रखने की जरूरत है। तकनीकी परिवर्तन के लाभों का उपयोग एक अच्छे जोखिम-मुक्त वातावरण में समावेशी और सहभागी विकास के लिए किया जाना चाहिए। 

लेख के मुताबिक, इन सबसे ऊपर, सरकारी पूंजीगत खर्च से निवेश में कॉरपोरेट क्षेत्र को भागीदार बनाया जाना चाहिए। लेख में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि यदि देशों के बीच संघर्ष समाप्त हो जाएं, कमोडिटी के साथ वित्तीय बाजारों, व्यापार-परिवहन और आपूर्ति नेटवर्क के माध्यम से उनके प्रभावों को नियंत्रित किया जाए, तो कमजोर वैश्विक दृष्टिकोण को अच्छा बनाया जा सकता है। 

रेटिंग एजेंसी इक्रा ने कहा है कि चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में भारत की आर्थिक विकास दर छह फीसदी से नीचे रह सकती है। खरीफ फसलों के उत्पादन में कमी और रबी में कुछ फसलों की कमजोर बुवाई का असर जीडीपी की वृद्धि पर दिखेगा। दूसरी तिमाही में देश की वृद्धि दर 7.6 फीसदी रही थी। इसका कहना है कि कुछ गतिविधियों में लगातार दूसरे महीने सुस्ती दिख रही है। 

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