चीन की हालत हो रही है खस्ता, शेयर बाजार की हिस्सेदारी में भारी गिरावट 

मुंबई-दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकॉनमी वाले देश चीन की हालत लगातार खस्ता होती जा रही है। पिछले साल दुनियाभर के शेयर बाजारों में तेजी आई थी लेकिन चीन का प्रदर्शन सबसे खराब रहा। हालत यह हो गई है कि एक अहम एमर्जिंग मार्केट इक्विटी बेंचमार्क में चीन की हिस्सेदारी रेकॉर्ड लो पर पहुंच गई है।  

31 दिसंबर को एमएससीआई एमर्जिंग मार्केट्स इंडेक्स में चीन के स्टॉक मार्केट की हिस्सेदारी 23.77 परसेट रह गई जो जून 2017 में 23.84 परसेंट थी। अमेरिकी की कंपनी ने जून 2017 में चीन के स्टॉक्स को अपने इंडेक्स में शामिल करने का फैसला किया था। सितंबर 2020 में इस इंडेक्स में चीन की हिस्सेदारी 38.5 परसेंट के रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। लेकिन उसके बाद इसमें करीब 15 फीसदी गिरावट आई है। 

चीन की इकॉनमी कोरोना महामारी के असर से उबरने के लिए संघर्ष कर रही है। उसे कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। रियल एस्टेट गहरे संकट में है, बेरोजगारी चरम पर है, विदेशी कंपनियां अपना बोरिया-बिस्तर समेट रही हैं और अमेरिका के साथ तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। इकॉनमी की लगातार खराब हो रही हालत के कारण विदेशी निवेशक चीन में अपना निवेश घटा रहे हैं। 2021 से चीन के शेयर बाजार को चार ट्रिलियन डॉलर से अधिक झटका लगा है।

पिछले साल चीन के शेयर बाजार ने दुनिया में सबसे खराब प्रदर्शन किया और इस साल भी हालात में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है। ईएम बेंचमार्क में चीन के वेटेज में गिरावट मार्केट के खराब प्रदर्शन, निवेशकों की बढ़ती बेरुखी और कैपिटल आउटफ्लो को दिखाता है। लगातार आ रहे कमजोर आंकड़ों और सरकार की सख्ती से चीन के इक्विटी बाजारों में आगे भी कोई उम्मीद नहीं दिख रही है।  

चीन को जब एमएससीआई ईएम इंडेक्स में जोड़ा गया था तो तब दावा किया गया था कि इस इंडेक्स में चीन का वेटेज 42 परसेंट तक पहुंच सकता है। लेकिन हाल के वर्षों में चीन के वेटेज में काफी गिरावट देखने को मिली है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भी हाल में माना कि देश की इकॉनमी फिसल रही है।

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