नया निवेश अप्रैल-दिसंबर में छह वर्षों में सबसे कम, 10.80 लाख करोड़ रुपये

मुंबई- देश में नया निवेश पिछले वित्त वर्ष अप्रैल-दिसंबर में छह वर्षों में सबसे कम रहा है। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी (सीएमआईई) के आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान यह 10.80 लाख करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा हुई है। हालांकि, 2020 में अप्रैल-दिसंबर में 5.94 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश की घोषणा हुई थी, पर उस दौरान कोरोना की वजह से लॉकडाउन होने से निवेश में कमी आई थी। 

आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-दिसंबर, 2019 में 13.80 लाख करोड़ रुपये की घोषणा हुई थी। 2018 में यह 13.44 लाख करोड़ रुपये रहा था। 2021 में 13.22 लाख करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा हुई। 2022 में सबसे अधिक 21.90 लाख करोड़ रुपये के नए निवेश की घोषणा हुई थी।  

पिछले साल दिसंबर तिमाही में केवल 2.15 लाख करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा हुई थी। आंकड़ों के मुताबिक, पिछली दस तिमाहियों की तुलना में दिसंबर, 2023 में निवेश सबसे कम रहा है। इससे पहले सबसे कम निवेश जून, 2019 में रहा था, जो 2.08 लाख करोड़ रुपये रहा था। 

नए निवेश में कमी के तीन प्रमुख कारण बताए गए हैं। इसमें पहला कारण इस साल होने वाला आम चुनाव है। इसलिए कंपनियां देखो और इंतजार करो की रणनीति अपना रही हैं। हर बार चुनाव से पहले ऐसा ही रुझान रहा है। अगर सरकार बदलती है तो फिर नीतियों में बदलाव से कंपनियों को नुकसान हो सकता है। इसलिए चुनाव के बाद कंपनियां निवेश को बढ़ा सकती हैं।  

दूसरा कारण ऊंची ब्याज दरें हैं। आरबीआई ने 2022 में दरों में 2.5 फीसदी का इजाफा किया था, जिससे कंपनियों के निवेश की रफ्तार धीमी हो गई। तीसरा कारण ज्यादातर क्षेत्रों में क्षमता अपने शीर्ष पर है, जिससे निवेश की जरूरत नहीं है। 

आंकड़ों के मुताबिक, सर्वाधिक 49 फीसदी निवेश की घोषणा सेवा क्षेत्र में रही है। इसमें भी 94 फीसदी नए विमानों के खरीदने पर खर्च होंगे, जो 4.96 लाख करोड़ होगा। वित्त क्षेत्र को छोड़कर सेवा में कुल 5.30 लाख करोड़ के निवेश की घोषणा हुई है। विनिर्माण में 28 फीसदी निवेश की घोषणा की गई है। केमिकल और इसके उत्पादों के क्षेत्र में 1.28 लाख करोड़ और इलेक्ट्रिसिटी में 2.27 लाख करोड़ रुपये खर्च होंगे। 

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