पिछले साल सरकारी कंपनियों ने दिया जमकर फायदा, 16 लाख करोड़ बढ़ी पूंजी 

मुंबई- पिछले साल घरेलू शेयर बाजार में करीब 20 फीसदी तेजी आई और बीएसई के मार्केट कैप यानी निवेशकों की वेल्थ में 85 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ। इसमें सरकारी कंपनियों का करीब 20 फीसदी हिस्सा है। पिछले साल सरकारी कंपनियों के मार्केट कैप में 16 लाख करोड़ रुपये का इजाफा हुआ।  

कुल 65 सरकारी कंपनियों का मार्केट कैप इस दौरान 45 फीसदी उछल गया। आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल सरकारी कंपनियों की मार्केट वैल्यू 15.8 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 50.5 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। इससे सरकार को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है क्योंकि उसकी इन कंपनियों में मैज्योरिटी हिस्सेदारी है। 

इस दौरान देश के बड़े औद्योगिक घरानों की मार्केट वैल्यू में सरकारी कंपनियों की तुलना में कम तेजी रही। आदित्य बिड़ला ग्रुप की मार्केट वैल्यू पिछले साल 38 फीसदी बढ़ी। इसी तरह टाटा ग्रुप की मार्केट वैल्यू में 32 फीसदी, बजाज ग्रुप की 23 फीसदी, रिलायंस इंडस्ट्रीज की वैल्यू में 1.6 फीसदी की तेजी आई जबकि अडानी ग्रुप की मार्केट वैल्यू 29 फीसदी गिर गई। सरकारी कंपनियां एनर्जी, इंश्योरेंस, पावर, रेलवे, बैंक, शिप-बिल्डिंग और पोर्ट्स जैसे सेक्टर्स में ऑपरेट करती हैं। 

सरकारी कंपनियों की बात करें तो बीते साल एनटीपीसी के मार्केट कैप में सबसे ज्यादा तेजी आई। कंपनी का मार्केट कैप 1.4 लाख करोड़ रुपये की तेजी के साथ 3.1 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। दूसरे नंबर पर एलआईसी रही। इसकी मार्केट वैल्यू पिछले साल 93,547 करोड़ रुपये बढ़कर 5.3 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई। इसी तरह कोल इंडिया का मार्केट कैप 67 परसेंट यानी 93,026 करोड़ रुपये की तेजी के साथ 2.3 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया।  

पिछले साल सबसे ज्यादा 254 फीसदी तेजी आरईसी के शेयरों में रही। आईआरएफसी के शेयरों में 205 फीसदी, एनटीपीसी के शेयरों में 87 फीसदी, इंडियन ऑयल में 70 फीसदी, कोल इंडिया में 67 फीसदी और एलआईसी के शेयरों में 22 फीसदी तेजी रही। 

एनटीपीसी में सरकार की 51.1 परसेंट हिस्सेदारी है जबकि एलआईसी में सरकारी हिस्सेदारी 96.5 परसेंट है। सितंबर अंत तक कोल इंडिया में सरकार की शेयरहोल्डिंग 63.1 परसेंट थी। मार्केट वैल्यू के हिसाब से देखें तो एसबीआई देश की सबसे बड़ी सरकारी कंपनी है। इसका मार्केट कैप 5.7 लाख करोड़ रुपये है। पिछले साल अधिकांश सरकारी बैंकों के शेयरों में तेजी रही लेकिन एसबीआई का शेयर केवल पांच परसेंट चढ़ा। एसबीआई में सरकार की 57.5 परसेंट हिस्सेदारी है। 

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