खाद्य सुरक्षा के लिए कृषि वस्तुओं पर ज्यादा आयात शुल्क लगाए भारत 

मुंबई- चावल जैसी संवेदनशील कृषि वस्तुओं पर उच्च आयात शुल्क बनाए रखने की जरूरत है। साथ ही, घरेलू क्षेत्र को कम टैरिफ के लिए खोलने के दबाव का विरोध करना भी जरूरी है। इससे भारत की आत्मनिर्भरता को बनाए रखने और इसकी आबादी के लिए खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। 

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (जीटीआरआई) ने रिपोर्ट में कहा, भारत को बेहतर स्वास्थ्य परिणामों को बढ़ावा देने और आयात बिल को कम करने के लिए आयातित वनस्पति तेलों पर निर्भरता घटाने की जरूरत है। इसके लिए ग्राहको को आयातित तेलों के बदले सरसों, मूंगफली और चावल की भूसी के स्थानीय तेलों के उपयोग से स्वास्थ्य लाभों के बारे में शिक्षित करने की जरूरत है।  

अमेरिका और यूरोपीय संघ वर्तमान में उत्पादन को बढ़ाने के लिए नई तकनीक का उपयोग करके, आयात को हतोत्साहित कर रहे हैं। आयात शुल्क और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर सब्सिडी देकर कृषि का समर्थन कर रहे हैं। 

रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2023-24 में 20.8 अरब डॉलर मूल्य के वनस्पति तेल का आयात कर सकता है है जो 2017-18 के 10.8 अरब डॉलर की तुलना में दोगुना है। भारत अपने एफटीए (मुक्त व्यापार समझौता) भागीदारों के लिए भी संवेदनशील वस्तुओं पर टैरिफ में कटौती नहीं कर रहा है। 

ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित और कृषि-निर्यातक देश हमेशा भारत जैसे विकासशील देशों पर अपने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कृषि वस्तुओं पर शुल्क और सब्सिडी में कटौती करने के लिए दबाव डालते हैं। भारत को घरेलू कृषि क्षेत्र को कम टैरिफ सब्सिडी वाले आयात के लिए नहीं खोलने के अपने मौजूदा दृष्टिकोण को जारी रखने की जरूरत है।  

संयुक्त राष्ट्र के अनुमान के मुताबिक, 30 वर्षों में अधिकांश देश खाद्य आयात पर निर्भर होंगे। भारत भाग्यशाली है कि वह वनस्पति तेलों को छोड़कर सभी कृषि और खाद्य पदार्थों में आत्मनिर्भर है। भारत का कृषि आयात 2023 में 33 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है जो कुल मर्चेंडाइज आयात का सिर्फ 4.9 फीसदी होग आयात की कीमतों में गिरावट से 2022 की तुलना में 2023 में आयात 18.6 फीसदी घटकर 17.1 अरब डॉलर हो जाएगा। 

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