मार्च तक 19 लाख करोड़ हो सकता है कर संग्रह, 10 वर्षों में तीन गुना बढ़ा 

मुंबई- व्यक्तिगत आय तथा कॉरपोरेट कर संग्रह बढ़कर मार्च तक 19 लाख करोड़ रुपये होने की संभावना है। इस दौरान केंद्र में नरेंद्र मोदी दस साल का कार्यकाल पूरा कर लेगी। इससे लोगों के लिए अनुकूल कर उपाय करने के अधिक अवसर मिलेंगे। 

शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह वित्त वर्ष 2013-14 में 6.38 लाख करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 16.61 लाख करोड़ रुपये रहा है। चालू वित्त वर्ष 2023-24 में शुद्ध प्रत्यक्ष कर (व्यक्तिगत आयकर तथा कॉरपोरेट कर) संग्रह अभी तक 20 फीसदी बढ़ा है। कर संग्रह बढ़ने की अगर यही रफ्तार रही तो 31 मार्च को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में संग्रह करीब 19 लाख करोड़ रुपये होने की संभावना है। यह 2023-24 के बजट में अनुमानित 18.23 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। 

सरकार कई वर्षों से कम दरों और कम छूट के साथ कर व्यवस्था को आसान बनाने की कोशिश कर रही है। 2019 में सरकार ने छूट छोड़ने वाले कॉरपोरेट घरानों के लिए कर की कम दर का विकल्प दिया था। अप्रैल 2020 में आम करदाताओं के लिए भी इसी तरह की योजना शुरू हुई थी। 

चुनाव के बाद बनने वाली नई सरकार जुलाई में पूर्ण बजट पेश कर सकती है। शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी में पार्टनर गौरी पुरी ने कहा कि कर लेनदेन के डिजिटलीकरण और अर्थव्यवस्था को औपचारिक बनाने पर ध्यान देने से कर भुगतान की प्रवृत्ति बढ़ी है। इससे सरकार को कर दरों को तर्कसंगत बनाने के कुछ अवसर मिलने की उम्मीद है। 2024 में सरकार से उम्मीद रहेगी कि वह कर बढ़ाने के लिए प्रत्यक्ष कर प्रावधानों को सुव्यवस्थित करना जारी रखेगी। 

(आईटीआर) की संख्या 2013-14 में 3.36 करोड़ से 90 फीसदी बढ़कर 2021-22 में 6.37 करोड़ हो गई। 2023-24 में, 26 अक्तूबर तक 7.41 करोड़ रिटर्न दाखिल किए गए हैं। इसमें 53 लाख नए करादाता हैं। वित्त वर्ष 2023-24 में औसत मासिक जीएसटी संग्रह 1.66 लाख करोड़ रुपये रहा है जो 2022-23 की तुलना में 11 फीसदी अधिक है। सबसे अधिक संग्रह अप्रैल, 2023 में रहा है जो 1.87 लाख करोड़ रुपये था। 

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