आरबीआई के नए नियम का असर- पर्सनल लोन घटकर 18.6 फीसदी पर पहुंचा 

मुंबई। नए पर्सनल लोन के वितरण में गिरावट आई है। नवंबर में यह 18.6 फीसदी रहा है जो एक साल पहले समान अवधि में 19.9 फीसदी रहा था। दरअसल, ऐेसे कर्जों के डूबने की आशंका को देखते हुए आरबीआई ने जोखिम भार की शुरुआत की थी। जिससे बैंकों और अन्य वित्तीय कंपनियों को ज्यादा रकम अपने पास रखनी पड़ रही है। 

आरबीआई ने शुक्रवार को रिपोर्ट में कहा कि पर्सनल लोन वितरण में नरमी आवास क्षेत्र में ताजा कर्ज वृद्धि में गिरावट के कारण भी थी। नवंबर तक नए पर्सनल लोन के तहत कुल वितरण 50.56 लाख करोड़ रुपये रहा जो एक साल पहले 41.80 लाख करोड़ रुपये था। 

आरबीआई के मुताबिक, कुल 41 बैंकों के बांटे गए कर्ज के आधार पर यह आंकड़ा लिया गया है। इनकी हिस्सेदारी कुल कर्ज में 95 फीसदी है। चालू वित्त वर्ष में अब तक पर्सनल लोन में 20.9 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। कृषि क्षेत्र में कर्ज की वृद्धि दर नवंबर, 2022 के 14 फीसदी से बढ़कर 18.2 फीसदी हो गई है। जबकि सेवा क्षेत्र में यह 21.3 फीसदी से बढ़कर 21.9 फीसदी रही है। 

बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की ओर से दंडात्मक ब्याज वसूलने के नियम को अब तीन महीन और बढ़ाकर मार्च तक कर दिया गया है। इसे एक अप्रैल से लागू करना होगा। पहले इसे जनवरी से लागू करना था। आरबीआई ने शुक्रवार को कहा कि बैंक और एनबीएफसी दंडात्मक शुल्क को लेकर सुधारित नियमों को एक अप्रैल से लागू करें।  

अगस्त में इस नियम की अधिसूचना जारी की गई थी। यह नियम नए कर्ज पर लागू होगा। पुराने कर्ज के मामले में इसे एक अप्रैल के बाद लेकिन 30 जून से पहले लागू करना होगा। इस नियम में आरबीआई ने कहा था बैंक और एनबीएफसी ग्राहकों से कर्ज के पुनर्भुगतान मामले में दंडामत्क ब्याज की जगह केवल एक उचित शुल्क ले सकते हैं। 

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