पीपीएफ पर बढ़ सकता है ब्याज, तीन साल से दरों में नहीं हुआ कोई इजाफा 

मुंबई- पब्लिक प्रॉविडेंट फंड यानी PPF पर ब्याज दरों में अप्रैल, 2020 से कोई बदलाव नहीं हुआ है। इसकी सुई 7.1% पर ही अटकी हुई है। इस दौरान सीनियर सिटीजन्स सेविंग्स स्कीम, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट और सुकन्या समृद्धि योजना जैसे दूसरी छोटी बचत योजनाओं के लिए ब्याज दर में तेजी आई है।  

इन्हें पोस्ट ऑफिस सेविंग्स स्कीम्स भी कहा जाता है। इनकी ब्याज दरों में हर तिमाही बदलाव किया जाता है। इस महीने के अंत में इनका रिवीजन होना है। क्या इस बार पीपीएफ की ब्याज दर में बदलाव होगा? इस साल अप्रैल में देश में आम चुनाव भी होने हैं। इसे देखते हुए सरकार पीपीएफ के निवेशकों को सरप्राइज दे सकती है। 

छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दर सेकंडरी मार्केट में 10 साल के मैच्योरिटी पीरियड वाले बॉन्ड्स पर मिलने वाले यील्ड पर निर्भर होती है। सरकार पिछले तीन महीने के औसत यील्ड के हिसाब से स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दर तय करती है। श्यामला गोपीनाथ कमेटी की सिफारिशों के मुताबिक ऐसा किया जाता है। फाइनेंस मिनिस्ट्री ने 2016 में यह फॉर्म्यूला नोटिफाई किया था।  

इसके मुताबिक पीपीएफ की ब्याज दर पिछले तीन महीने के बेंचमार्क यील्ड से 25 बेसिस अंक अधिक होता है। सितंबर से अक्टूबर, 2023 के दौरान बेंचमार्क 10 ईयर बॉन्ड यील्ड 7.28% रहा है। इस हिसाब से देखा जाए तो जनवरी-मार्च तिमाही में पीपीएफ की ब्याज दर करीब 7.53% होनी चाहिए। लेकिन केंद्र सरकार ने पिछली तिमाहियों के दौरान इस फॉर्म्यूले के आधार पर पीपीएफ का ब्याज नहीं बढ़ाया है। 

पिछली कुछ तिमाहियों में पीपीएफ की ब्याज दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। बाकी छोटी बचत योजनाओं का ब्याज फॉर्म्यूले के मुताबिक है। इसलिए पीपीएफ के लिए ब्याज में बढ़ोतरी होनी चाहिए। जनवरी-मार्च तिमाही में पीपीएफ पर ब्याज में बढ़ोतरी की संभावना नहीं के बराबर है। हालांकि अगले साल होने वाले आम चुनावों को देखते हुए सरकार सरप्राइज दे सकती है।

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