पीएफ खाते से कोरोना की एडवांस निकासी सुविधा बंद, ग्राहकों को नुकसान 

मुंबई- कोरोना के समय खाताधारकों को पीएफ खाते में से एडवांस के रूप में पैसे निकालने की सुविधा दी गई थी। अब इस सुविधा को खत्म कर दिया गया है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने यह फैसला लिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सात महीने पहले ही यह घोषणा कर दी थी कि कोविड-19 महामारी अब पब्लिक हेल्थ एमरजेंसी नहीं रह गई है। 

ईपीएफओ के एक अधिकारी ने कहा कि एक हफ्ते पहले हुई एक मीटिंग में यह फैसला लिया गया था। अभी अधिसूचना जारी नहीं की गई है। सॉफ्टवेयर में नॉन-रिफंडेबल कोविड एडवांस के प्रॉविजन को बंद करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि सदस्य इसके लिए आवेदन न कर सकें।

जानकारों का कहना है कि ईपीएफओ के इस कदम से खपत के प्रभावित होने की आशंका है, क्योंकि कोविड एडवांस को गैर-जरूरी खर्च के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। ईपीएफओ ने यह फैसला काफी देर से लिया है और इससे ईपीएफओ के पास फंड की उपलब्धता प्रभावित हुई है। इस पैसे को निवेश किया जा सकता था। यानी अप्रत्यक्ष रूप से ईपीएफओ के सदस्यों का रिटर्न प्रभावित हुआ है। 

ट्रेड यूनियन से जुड़े एक अधिकारी ने कहा, यह सरकारी बाबुओं की लापरवाही है। यह फैसला काफी देर से लिया गया। इसका इस्तेमाल इलाज के लिए नहीं हो रहा था। इससे सदस्यों की बचत घट गई है। कुल 2.2 करोड़ सदस्यों ने कोरोना एडवांस सुविधा का लाभ उठाया जो ईपीएफओ के कुल सदस्यों की संख्या का एक तिहाई से ज्यादा है। यह सुविधा 2020-21 में शुरू हुई थी और तीन साल तक रही। 

कोरोना के दौरान पीएफ सदस्यों ने कोरोना एडवांस के रूप में 48,075.75 करोड़ रुपये निकाले। ईपीएफओ की 2022-23 की रिपोर्ट के अनुसार, 2020-21 में 17,106.17 करोड़ रुपये वितरित किए गए, जिससे 69.2 लाख सदस्यों को फायदा हुआ। साल 2021-22 में 91.6 लाख सदस्यों ने इस सुविधा का लाभ उठाया और 19,126.29 लाख करोड़ रुपये निकाले। 

2022-23 में 62 लाख सदस्यों ने पीएफ खाते से 11,843.23 करोड़ रुपये की निकासी की। ईपीएफओ के छह करोड़ से ज्यादा सदस्य हैं और यह 20 लाख करोड़ रुपये से अधिक की रकम का प्रबंधन करता है।

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