गेहूं, चावल व चीनी पर प्रतिबंध से निर्यात में आ सकती है 43,000 करोड़ की कमी 

मुंबई- गेहूं, चावल और चीनी के व्यापार पर प्रतिबंध लगाने के बाद इस साल भारत के निर्यात में लगभग 43,000 करोड़ रुपये तक की कमी आ सकती है। साथ ही लाल सागर के हमलों से बासमती चावल के शिपमेंट पर भी असर पड़ सकता है। दुनिया में गेहूं, चावल और चीनी के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक, भारत ने बढ़ती घरेलू कीमतों पर लगाम लगाने के लिए इन वस्तुओं के निर्यात को प्रतिबंधित कर दिया है। 

सूत्रों के मुताबिक, अगर यमन के हौथी समूह के हमले जारी रहते हैं तो भारत सरकार बासमती चावल के शिपमेंट के लिए अफ्रीका के साथ एक वैकल्पिक मार्ग पर विचार कर सकती है। हालांकि, इससे कीमतें भी लगभग 15 से 20 फीसदी तक बढ़ सकती हैं। वैकल्पिक मार्ग भारत के मिस्र और यूरोप को लंबे चावल के निर्यात को भी प्रभावित कर सकता है। 

हालांकि, व्यापार मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव राजेश अग्रवाल का कहना है कि भारत को उम्मीद है कि इस साल निर्यात घाटे की भरपाई के लिए अन्य कृषि वस्तुओं के निर्यात में वृद्धि होगी। अगर हम गेहूं और चावल जैसी कृषि वस्तुओं को हटा दें तो भी निर्यात चार फीसदी से अधिक बढ़ रहा है। इसलिए, चीनी, गेहूं, चावल पर प्रतिबंध के कारण लगभग 43,000 करोड़ रुपये की कमी के बावजूद, हमें पिछले वर्ष के निर्यात स्तर को पूरा करने में सक्षम होना चाहिए। 

एग्रीकल्चरल एंड प्रोसीज्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (एपीडा) के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल अप्रैल से नवंबर के बीच मांस और डेयरी, तैयार अनाज और फलों व सब्जियों के निर्यात में वृद्धि हुई है। हालांकि, चावल का निर्यात इसी दौरान 7.65 फीसदी घटकर 6.5 अरब डॉलर रह गया है। 

चावल, गेहूं और चीनी सहित कुछ प्रमुख वस्तुओं के शिपमेंट पर लगाए गए प्रतिबंधों के बावजूद चालू वित्त वर्ष में भारत का कृषि निर्यात पिछले साल के 53 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंचने की उम्मीद है। राजेश अग्रवाल ने कहा, हमें उम्मीद है कि प्रतिबंधों के बाद होने वाले संभावित नुकसान के बाद भी हम पिछले वित्त वर्ष के स्तर तक पहुंच जाएंगे। 

अग्रवाल ने कहा कि सरकार केले और मूल्यवर्धित मोटे उत्पादों को नए वैश्विक गंतव्यों पर निर्यात को बढ़ावा दे रही है। अगले तीन साल में केला का निर्यात एक अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है। 

सरकार ने कीमतों को नियंत्रित करने और आपूर्ति बढ़ाने के लिए खुला बाजार बिक्री योजना के तहत 26वीं ई-नीलामी के जरिये थोक ग्राहकों को 3.46 लाख टन गेहूं और 13,164 टन चावल की बिक्री की है। चावल की औसत कीमत 2,905 रुपये प्रति क्विंटल और गेहूं की 2,178 रुपये प्रति क्विंटल रही। मार्च, 2024 तक केंद्र 1015 लाख टन गेहूं बेचने का निर्णय लिया है। 

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