नए साल में निवेश के लिए यह सेक्टर हैं बेहतर, जानिए कहां मिलेगा फायदा 

मुंबई- साल खत्म हो रहा है तो देखिए कि आपका निवेश आपको अपने जीवन के लिए तय लक्ष्यों की ओर ले जा रहा है या नहीं। देखिए कि आपका निवेश आपको खास लक्ष्यों तक पहुंचा रहा है या नहीं और जरूरत हो तो अपनी रणनीति बदलिए। अगर आपको ऐसा लग रहा है कि बाजार के हालात के कारण आपका पोर्टफोलियो तय की गई रकम तक नहीं पहुंचा पाएगा तो आपको और रकम निवेश करनी चाहिए। 

इसके बाद अपने लक्ष्यों पर भी नजर डालिए। अपने लक्ष्यों का हर साल जायजा लेने से आपको बेकार हो चुके पुराने लक्ष्य छोड़ने और समय के हिसाब से नए लक्ष्य तय करने का मौका मिल जाता है। इसके लिए आपको निवेश की जा रही राशि और निवेश की अवधि भी बदलनी पड़ सकती है। 

साल 2023 में सबसे अच्छा प्रदर्शन शेयरों का रहा और उसके बाद सोना रहा। शेयर या इक्विटी में भी स्मॉल कैप फंड सबसे तेज दौड़े और मिड कैप तथा लार्ज कैप फंड को पछाड़ दिया। बाजार नई ऊंचाई पर पहुंचता है तो कई निवेशक मुनाफे में शेयर बेच डालते हैं ताकि सही समय पर दोबारा खरीद सकें। इसे सही समय भांपने वाला ही कर सकता है और बार-बार ऐसा करना नामुमकिन ही होता है। 

यह भांपना नामुमकिन होता है कि बाजार आगे चढ़ेगा या गिरेगा। इसलिए निवेशकों को अपने शुरुआती संपत्ति आवंटन पर टिके रहना चाहिए और किसी खास संपत्ति श्रेणी में जरूरत से ज्यादा निवेश होने पर ही बदलाव करना चाहिए। कर से बचना है तो जिन संपत्ति श्रेणियों ने इस बार बेहतरीन रिटर्न दिया है, उन्हें बेचने की न सोचें। उसके बजाय डेट और लार्ज कैप जैसी उन श्रेणियों में ज्यादा रकम लगाएं, जिनका प्रदर्शन इस साल उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा। संपत्ति आवंटन के बारे में फैसला करते समय यह जरूर देखिए कि निवेश कितने समय के लिए करना है। 

दो साल से कम वक्त के लिए रकम लगानी है तो शॉर्ट टर्म डेट फंड चुनिए, दो से सात साल के लिए रकम लगानी है तो मीडियम टर्म डेट फंड, हाइब्रिड फंड या मल्टी-असेट डेट फंड ठीक रहेंगे और सात साल से ज्यादा समय है तो इक्विटी फंड आपके लिए फायदेमंद हो सकते हैं। 

संपत्ति आवंटन तय करते समय निवेश की मियाद के साथ यह भी देखिए कि आप कितना जोखिम बर्दाश्त कर सकते हैं। बच्चे की कॉलेज शिक्षा जैसे दूर का लक्ष्य अगर अब करीब आ रहा है तो सतर्क हो जाएं। अगर बच्चे को दो-तीन साल बाद कॉलेज में दाखिला लेना है तो अपनी रकम इक्विटी से हटाकर डेट में लाना शुरू कर दें ताकि शेयर बाजार में होने वाली उठापटक आपकी योजना पटरी से न उतार दे। 

इसके बाद हरेक फंड के प्रदर्शन को आंकना भी जरूरी है। हरेक फंड के प्रदर्शन को बेंचमार्क और श्रेणी के औसत रिटर्न की कसौटी पर कसें। मोटे आंकड़े देखने भर से आपको सही स्थिति का पता नहीं चलेगा।’ प्रदर्शन मापने का आसान तरीका लंबे अरसे (7 से 10 साल) में मिला रिटर्न है। यह बेंचमार्क रिटर्न से कम रहता है तो उस फंड पर लगातार नजर रखें। पांच या छह तिमाही तक सुस्ती रहे तो उस फंड से निकल जाएं। साथ ही अपने फंड में जोखिम के बाद मिलने वाले रिटर्न और उतार-चढ़ाव भी देखते रहें। 

कभी-कभी एक मकसद से बचाई जा रही रकम किसी दूसरे मकसद में लगानी पड़ जाती है। उस सूरत में पहले मकसद के लिए और भी ज्यादा रकम निकालना शुरू कर दीजिए। सेन की आखिरी सलाह खर्चों पर नजर रखने की है ताकि आपका बजट न बिगड़ जाए। 

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