पांचवीं पास भी नहीं हैं, और आज भारत की सबसे अमीर महिला की लिस्ट में

मुंबई- सिर पर पल्लू और चेहरे पर सादगी…आम भारतीय महिला की तरह घर के कामकाज संभालने वाली सावित्री को पता नहीं था कि मुश्किलों और चुनौतियों का दौर आने वाला है। हादसे में पति की मौत हो गई। 9 बच्चों की जिम्मेदारी उनके अकेले कंधों पर आ गई। परिवार और बच्चों के साथ-साथ सबसे बड़ा सवाल था कि अब कारोबार कौन संभालेगा ? सावित्री के पास न तो डिग्री थी और न ही बिजनेस का अनुभव।  

परिवार की जिम्मेदारी, दिवंगत पति का बिजनेस और राजनीतिक विरासत को आगे ले जाने की चुनौती उनके सामने थी। जहां हर किसी को लग रहा था कि अनुभव की कमी के चलते सालों का बना बनाया बिज़नेस बिखर जाएगा। परिवार के मुखिया की कमी के चलते परिवार बिखर जाएगा, सावित्री ने उन अनुमानों को गलत साबित कर दिया। सावित्री ने अपने हौंसले के दाम पर दो साल में ही कारोबार को दोगुना कर दिया।  

आज वो देश की सबसे अमीर महिला बन चुकी हैं। भारत के अमीरों की लिस्ट में वो 5वें नंबर पर पहुंच चुकी है। ये कहानी है जिंदल समूह की चेयरपर्सन सावित्री जिंदल की। उन्होंने 2.08 लाख करोड़ रुपए की दौलत के साथ भारत के अमीरों की लिस्ट में पांचवां स्थान हासिल कर लिया है। हालांकि ये सफर इतना आसान नहीं था, तमाम उतार-चढ़ाव के बाद उन्होंने ये मुकाम हासिल कर लिया।

सावित्री जिंदल का जन्म 20 मार्च 1950 को असम के तिनसुकिया में हुआ। उस दौर में लड़कियों को बहुत पढ़ाने-लिखाने का चलन नहीं था। सावित्री के परिवार ने भी उनकी पढ़ाई पर जोर नहीं दिया। जब वो 20 साल की हुईं, उनकी शादी हरियाणा के ओम प्रकाश जिंदल से कर दी गई। साल 1970 में ओम प्रकाश जिंदल और सावित्री शादी के बंधन में बंध गए। दोनों की उम्र में 20 साल का अंतर था। ओम प्रकाश जिंदल यहां जिंदल समूह को संभाल रहे थे तो वहीं सावित्री जिंदल परिवार की जिम्मेदारियों को संभाल रही थीं। ओम प्रकाश जिंदल राजनीति में कदम रख चुके थे। हरियाणा की राजनीति में वो बड़ा चेहरा बन चुके थे, लेकिन एक हादसे ने सबकुछ बदल दिया। सावित्री पर मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़ा।

साल 2005 में हेलीकॉप्टर हादसे में ओम प्रकाश जिंदल की मौत हो गई। पति की मौत होते ही मुश्किलों ने सावित्री जिंदल को घेर लिया। शादी के 35 साल तक सावित्री हाउस वाइफ बनीं रही। घर की जिम्मेदारियां संभालती रहीं, लेकिन अब उनके सामने बड़ी चुनौती थी पति के बिजनेस और सियासी विरासत को संभालने की।  

चार बेटे और पांच बेटियों की जिम्मेदारी के साथ उन्हें जिंदल ग्रुप को भी संभालना था, लेकिन मन में डर था। उनके पास न तो कॉलेज की डिग्री थी और न ही बिजनेस का कोई अनुभव। अगर कुछ था तो बस हौंसला। सावित्री ने जिंदल ग्रुप की कमान संभालने के साथ-साथ सियासत में भी कदम रखा। दो साल कड़ी मेहनत की और वो करके दिखा दिया, जिसपर कोई भरोसा नहीं कर पा रहा था। 

​सावित्री जिंदल ने दो साल में जिंदल समूह की संपत्ति में 12 अरब डॉलर का इजाफा कर दिया। उन्होंने अपनी कंपनी को चार टुकड़ों में बांटा और उसकी जिम्मेदारी अपने चार बेटों पृथ्वीराज जिंदल, सज्जन, रतन और नवीन जिंदल को सौंप दी। अपने पास जिंदल समूह के चेयरपर्सन की कुर्सी रखी। सावित्री जिंदल के बड़े बेटे पृथ्वीराज, जिंदल सॉ कंपनी के चेयरमैन हैं। वहीं, सज्जन जिंदल जेडब्ल्यूएस कंपनी की कमान संभालते है। छोटे बेट नवीन जिंदल को जिंदल स्टील की जिम्मेदारी सौंपी गई। उनके बड़े भाई रतन जिंदल कंपनी में डायरेक्टर हैं। जिंदल समूह का कारोबार आज देश-दुनिया में फैला है। 

हाल ही में जारी किए गए ब्लूमबर्ग बिलेनियर्स इंडेक्स के मुताबिक जिंदल परिवार की संपत्ति में बड़ी बढ़ोतरी हुई और 25 बिलियन डॉलर यानी करीब 2.08 लाख करोड़ रुपए के नेटवर्थ के साथ सावित्री जिंदल देश की सबसे अमीर महिला बन गई। देश के अरबपतियों की लिस्ट में उन्हें पांचवां स्थान मिला। उन्होंने विप्रो के चेयरमैन अजीम प्रेमजी को पीछे छोड़ पांचवीं रैंक हासिल की। उनकी नेटवर्थ पिछले दो सालों में 87% बढ़ी है। सावित्री जिंदल की कंपनी जिंदल ग्रुप स्टील, पावर, सीमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में काम करती है। 

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