निवेशकों को फायदा देने में सोना सबसे आगे, शेयर बाजार रहा दूसरे नंबर पर 

मुंबई- इस समय सेंसेक्स के 70,000 पहुंचने के खूब चर्चे हैं। सेंसेक्स ने 60 हजार से 70 हजार तक पहुंचने में 549 सत्र लिये हैं। 24 सितंबर, 2021 को सेंसेक्स ने 60,000 का स्तर छुआ था। यह 11 दिसंबर, 2023 को 70,000 के लेवल तक पहुंचा। इस दौरान सेंसेक्स में 16.5 फीसदी बढ़ा है। वहीं, इस अवधि के दौरान डाउ जोन्स में सिर्फ 4.2 फीसदी का ही इजाफा हुआ। उधर चीनी सूचकांक संघाई 17.2 फीसदी गिर गया। 

अगर आप 24 सितंबर 2021 को एक लाख रुपये का ब्रेंट क्रूड लेते तो 11 दिसंबर को यह रकम गिरकर 95,582 रुपये होते। वहीं, बिटकॉइन में आपने यह रकम लगाई होती, तो सोमवार तक वह रकम 98,742 रुपये होती। अगर आपने 60,000 के स्तर पर एक लाख रुपये सेंसेक्स में लगाए होते, तो सोमवार को यह रकम 1,16,455 रुपये होती। चांदी में अगर आपके 1 लाख रुपये इस अवधि में लगाए होते, तो ये 1,21,796 रुपये हो जाते। वहीं, सोने ने इस अवधि में धांसु रिटर्न दिया है। सोने में लगाए 1 लाख रुपये इस अवधि में 1,34,795 रुपये हो गए। 

पिछले दो वर्षों में भारतीय बाजार ने कई घरेलू कारणों से तेजी का सफर तय किया है। दूसरी तरफ, दुनिया के बाजार कई वर्षों की उच्च महंगाई के बीच जूझते दिखाई दिए। इसके अलावा, केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरें बढ़ाईं, यूरोप और पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा बढ़ा, अमेरिका में एक बैंक डूबा और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव दिखाई दिया। भारत में कुछ मजबूत बुनियादी बातें जैसे टैक्स कलेक्शन में अच्छी वृद्धि, अपेक्षाकृत स्थिर मुद्रा, रिकॉर्ड स्तर के पास विदेशी मुद्रा भंडार और कम ब्याज दरों ने निवेशकों का उत्साह बढ़ाया। एक्सपर्ट्स का कहना है कि मजबूत कॉरपोरेट आय वृद्धि और समय पर सेक्टोरल रोटेशन ने भी बाजार की तेजी में मदद की। इन सभी कारकों ने सेंसेक्स और निफ्टी को रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचा दिया।

सोमवार को भी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) 1,261 करोड़ रुपये के शुद्ध खरीदार थे। इस महीने में अब तक, निवेशकों के इस प्रभावशाली समूह ने स्टॉक्स के माध्यम से 32,000 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध निवेश किया है। हालांकि, एफपीआई आमतौर पर भारतीय शेयर बाजार में अपने व्यापार की भारी वॉल्यूम से सुर्खियों में रहते हैं। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि जब विदेशी फंड आक्रामक रूप से बेचते हैं, तो घरेलू म्यूचुअल फंड ही असली संतुलन बनकर उभरे हैं। 

अक्टूबर 2021 (सेंसेक्स के 60,000 अंक पार करने के बाद) और सोमवार के बीच, विदेशी फंड अभी भी लगभग 24,500 करोड़ रुपये के शुद्ध विक्रेता हैं। इसके विपरीत, घरेलू म्यूचुअल फंडों ने लगभग 4 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश शेयर बाजार में किया है। इस अवधि के दौरान सेंसेक्स में लगभग 16% की बढ़ोतरी हुई है। निवेशकों की संपत्ति लगभग 95 लाख करोड़ रुपये बढ़ी है और भारतीय बाजार अब मार्केट कैप के मामले में दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा बाजार है। 

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