पूर्व गवर्नर राजन ने कहा, भारतीय शेयर बाजार की तेजी के झांसे में न फंसें 

मुंबई-  घरेलू शेयर बाजार रोज-रोज नए रेकॉर्ड बना रहा है। इसके साथ ही भारत उन चंद देशों की जमात में शामिल हो गया है जिनका मार्केट कैप चार ट्रिलियन डॉलर से अधिक है। लेकिन आरबीआई के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन का कहना है कि शेयर बाजार ब्रॉडर इकनॉमिक सक्सेस का अच्छा पैमाना नहीं है।  

उनका कहना है कि स्टॉक मार्केट ब्रॉडर इकॉनमी की गुमराह करने वाली तस्वीर पेश करता है। इसमें तेजी से बड़ी कंपनियां और बड़ी हो रही हैं जबकि छोटी कंपनियां सिकुड़ती जा रही हैं। रघुराम राजन और अर्थशास्त्री रोहित लांबा ने हाल में रिलीज किताब में यह बातें कही हैं। 

राजन ने इस किताब में कहा है कि नोटबंदी, महामारी और जीएसटी जैसे कई कारणों से देश में बड़ी कंपनियों का मुनाफा बढ़ा है जबकि छोटी और इनफॉर्मल सेक्टर की कंपनियों का प्रदर्शन काफी खराब रहा है। लेकिन स्टॉक मार्केट में केवल बड़ी कंपनियों का प्रदर्शन देखा जाता है जो देश में ब्रॉडर इकॉनमी की भ्रामक तस्वीर पेश करता है। जून 2016 में नोटबंदी से कुछ ही पहले के बाद से अपेरल और लेदर जैसी ज्यादा रोजगार देने वाले सेक्टर्स की छोटी कंपनियों की संख्या कम हुई हैं।

मोदी सरकार की नीतियों के धुर आलोचक रहे आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने कहा कि दुनिया में मंदी का खतरा कम हो रहा है और चीन से भारत में फ्लो बढ़ रहा है। इस कारण भारत में तेजी देखी जा रही है। दुनिया के सभी देशों में शेयर बाजार में तेजी आ रही है। अमेरिका और चीन के बीच तनाव बना हुआ है और एमर्जिंग मार्केट इन्वेस्टर्स चीन का विकल्प खोज रहे हैं। इसका फायदा भारत को हो रहा है।

भारत को चीन के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। इस साल विदेशी निवेशक भारतीय शेयर मार्केट में 16 अरब डॉलर का निवेश कर चुके हैं। दूसरी ओर चीन में नया विदेशी निवेश दूसरी तिमाही में 25 साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। भारत में सेंसेक्स और निफ्टी रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए हैं। नवंबर में सभी लिस्टेड शेयरों का मार्केट कैप चार लाख करोड़ डॉलर के पार पहुंच गया। मार्केट वैल्यू के हिसाब से भारत दुनिया में पांचवें नंबर पर है। अमेरिका, चीन, जापान और हॉन्ग कॉन्ग टॉप चार पर हैं। 

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