कीमतें और ब्याज दरें बढ़ने से लोगों की मकानों के खरीदने की क्षमता घटी 

मुंबई- ब्याज दरों और कीमतों के बढ़ने से पिछले दो वर्षों में सात प्रमुख शहरों में घर खरीदने की लोगों की क्षमता में गिरावट आई है। जेएलएल इंडिया के अनुसार, रेपो दर में अगर कमी आती है तो अगले साल इसमें सुधार दिख सकता है। खरीदने की क्षमता में सुधार से घर की बिक्री को और बढ़ावा मिलेगा।

जेएलएल ने रविवार को होम परचेज अफोर्डेबिलिटी इंडेक्स (एचपीएआई) जारी किया। इसने कहा, 2022 की तुलना में 2023 में मकान खरीदने की लोगों की क्षमता थोड़ी कम हो सकती है या समान रह सकती है। 2024 में घर खरीदने की क्षमता में सुधार दिख सकता है। उस दौरान ब्याज दरों में कटौती के संकेत हैं जिससे मकानों की बिक्री बढ़ सकती है। जेएलएल को उम्मीद है कि रेपो दर में 0.60 से 0.80 फीसदी तक कटौती हो सकती है। 

एचपीएआई औसत घरेलू आय और पात्र घरेलू आय का अनुपात है। योग्य घरेलू आय वह न्यूनतम आय है जो एक परिवार को मौजूदा बाजार मूल्य पर 1,000 वर्ग फुट के अपार्टमेंट पर होम लोन के लिए योग्य हो। आंकड़ों के अनुसार, मुंबई में मकान खरीदने की क्षमता 92 से घटकर 88 पर आ गई है। जबकि दिल्ली-एनसीआर में यह 125 से घटकर 121 पर आ गई है। 

रिपोर्ट के अनुसार, बंगलूरू में घर खरीदने की क्षमता का इंडेक्स 168 से घटकर 158 पर आ गया है। हैदराबाद में यह 174 से 169 पर आ गया है। पुणे में 183 से 182 और कोलकाता में यह 194 से 193 पर आ गया है। चेन्नई का इंडेक्स 162 पर ही स्थिर रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, यह इंडेक्स 2013 में सबसे निचले स्तर था। लेकिन 2014 से इसमें तेजी आई थी। 

इंडेक्स में 100 का स्तर होने का मतलब एक परिवार के पास लोन पाने के लिए पर्याप्त आय है। 100 से कम मूल्य का अर्थ है कि एक औसत परिवार के पास होन लोन के लिए पर्याप्त आय नहीं है। 

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