नहीं बढ़ेंगे चीनी के दाम, गन्ने के जूस से एथेनॉल बनाने पर रोक, फैसला लागू 

मुंबई- चीनी की बढ़ रही कीमतों और इसके भंडार को नियंत्रित करने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। सरकार ने जारी अधिसूचना में चीनी मिलों और डिस्टलरीज को गन्ने के जूस या सीरप से एथेनॉल बनाने पर रोक लगा दी है। इससे घरेलू बाजार में बनी चीनी की कमी नहीं होगी। यह फैसला चीनी कंपनियों के लिए एक बड़ा झटका है। 

सूत्रों के मुताबिक, 5 दिसंबर को मंत्रियों के समूह में हुई बैठक में इस बात पर चर्चा हुई थी, लेकिन फैसला बृहस्पतिवार को हुआ। सरकार को आशंका है कि अगर एथेनॉल बनना जारी रहा तो चीनी की किल्लत हो सकती है। 2023-24 में चीनी उत्पादन घटने की वजह से चिंता बढ़ गई है। पानी की की कमी से 2024-25 के लिए महाराष्ट्र में होने वाली खेती अभी शुरू भी नहीं हुई है। 

पिछले साल के मुकाबले चीनी उत्पादन में 8 फीसदी कमी का अनुमान है। 2023-24 के लिए 3.37 करोड़ टन चीनी उत्पादन का अनुमान है। चीनी की किल्लत से निपटने के लिए सरकार के पास महज तीन विकल्प थे। इसमें या तो एथेनॉल की कीमत घटा दे या फिर चीनी कंपनियां एथेनॉल की ज्यादा आपूर्ति ना कर सकें। या फिर गन्ने से बनने वाले एथेनॉल को फिलहाल रोक दें। 

सरकार ने मिलों को बी-हैवी एथेनॉल पर कोई रोक नहीं लगाई है। स्थानीय बाजार में चीनी की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। प्रमुख राज्यों कर्नाटक और महाराष्ट्र में कम बारिश से चीनी उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसलिए सरकार पर्याप्त चीनी उपलब्धता सुनिश्चित करने का उपाय कर रही है। 

कम बारिश के चलते गन्ने की फसल खराब हुई है। इससे दुनिया के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक भारत ने 31 अक्तूबर तक चीनी निर्यात पर रोक लगा दी थी। एथेनॉल उत्पादन को सीमित करने से भारत में चीनी भंडार नहीं घटेगा। तेल मार्केटिंग कंपनियों के साथ चीनी कंपनियों ने एथेनॉल आपूर्ति के लिए करार किया है। एक नवंबर से शुरू सीजन के लिए 31.7 लाख टन चीनी के बराबर एथेनॉल की नीलामी हो चुकी है। हालांकि, अभी तक इसकी कीमत तय नहीं है। 

सरकार ने सोमवार को राज्यसभा को बताया कि देश में वर्तमान एथेनॉल उत्पादन क्षमता 1,364 करोड़ लीटर है। यह ईंधन मिश्रण लक्ष्य को पूरा करने के लिए पर्याप्त है। तेल विपणन कंपनियों ने एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2021-22 के दौरान 10 फीसदी और 2022-23 के दौरान 12 फीसदी एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल किया है। 

सरकार के फैसले से चीनी कंपनियों के शेयरों में 8 फीसदी तक की गिरावट देखी गई। इनमें धामपुर, बलरामपुर, द्वारिकेश, रेणुका, ईद पैरी, बजाज हिंदुस्तान, उत्तम, अवध और अन्य कंपनियों के शेयरों में गिरावट रही। 

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