फिनटेक कंपनियां अब छोटे पर्सनल लोन में करेंगी कटौती, बैंकों का आदेश 

मुंबई- बड़े बैंकों और गैर-बैंक कर्जदाताओं ने अपने फिनटेक भागीदारों से छोटे पर्सनल लोन में कमी करने को कहा है। सूत्रों ने कहा कि आरबीआई की ओर से हालिया मिली चेतावनी के बाद यह कदम उठाया गया है। आरबीआई का मानना है कि इस तरह के छोटे पर्सनल लोन आगे चलकर डूब सकते हैं। 

बैंकों और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के इस फैसले के बाद ही बुधवार को पेटीएम ने 50,000 रुपये से कम वाले कर्जों में कमी करने की जानकारी दी थी। इससे उसके शेयरों में 19 फीसदी तक की गिरावट आई है। पिछले महीने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बैंकों और एनबीएफसी को इस तरह के लोन के लिए ज्यादा पूंजी अतिरिक्त के रूप में रखने के लिए नियमों को सख्त कर दिया था। 

लगभग एक दर्जन फिनटेक को कर्ज देने वाले निजी क्षेत्र के बैंक के अधिकारी ने कहा, आरबीआई के बाद के फैसले से हमें ऐसा करना पड़ा रहा है। आगे और भी सारे बैंक यह कदम उठा सकते हैं। हमने अपने फिनटेक भागीदारों को कहा है कि हम 50,000 रुपये से कम ऋण श्रेणी में मौजूद नहीं रहना चाहते हैं। 

एक अन्य बैंक अधिकारी ने कहा, हालाँकि हम फिनटेक भागीदारों को दी जाने वाली फंडिंग में पूरी तरह से कटौती नहीं करेंगे। लेकिन हमने उनके द्वारा छोटे पर्सनल लोन को बेहिसाब बांटने पर रोक लगाने को कहेंगे। पेटीएम के अलावा, कई छोटी फिनटेक कंपनियों ने छोटे-छोटे व्यक्तिगत ऋणों के लिए बैंकों और एनबीएफसी के साथ गठजोड़ किया है। ऐसे में इस तरह के फैसले से उनको कर्ज देने में दिक्कतें आ सकती हैं। 

विश्लेषकों का मानना है कि बैंकों और एनबीएफसी के इस फैसले से कर्ज बांटने की दर 12-14 फीसदी पर आ सकती है जो अभी 15 फीसदी है। मैक्वायरी ने कहा कि बैंक की वृद्धि और संपत्ति की गुणवत्ता यानी एनपीए पर नियामकीय निगरानी बढ़ गई है। इससे सावधानी बरती जा रही है। एक सरकारी बैंकर ने कहा कि हमने अपने फिनटेक भागीदारों से कहा है कि वे चुनिंदा कर्ज ही बांटें। हम नियामक की नजरों में नहीं आना चाहते हैं। ऐसे में कुछ समय तक इस सेगमेंट से दूर रहना चाहते हैं। 

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