अगले साल 77 कंपनियों ने आईपीओ के लिए जमा की मसौदा, 29 को मंजूरी

मुंबई- चालू कैलेंडर साल में अब तक आईपीओ की जबरदस्त धूम रही है। अच्छी बात यह है कि 95 फीसदी इश्यू में निवेशकों को फायदा हुआ है। कुछ कंपनियों के शेयरों को निवेशकों ने हाथोंहाथ लिया है। आईपीओ की यह धूम अगले साल भी रहेगी।   

शेयर बाजार में इस समय अच्छी तेजी है। सेंसेक्स 67,000 के पार तो निफ्टी सार्वकालिक उच्च स्तर पर है। 77 कंपनियां आईपीओ लॉन्च करने का इंतजार कर रही हैं। इनमें से 29 को पहले ही पूंजी बाजार नियामक सेबी से हरी झंडी मिल चुकी है। अन्य को मंजूरी का इंतजार है। लोग इस समय बाजार में जबरदस्त निवेश कर रहे हैं। आईपीओ से लेकर सेकंडरी बाजार तक में पैसे आ रहे हैं। लेकिन यहां बड़ा सवाल यह है कि क्या आईपीओ को खरीदना हमेशा अच्छा विचार है? 

आईपीओ को लेकर उत्साह समझ में आता है। वे कंपनी का एक हिस्सा हथियाने का पहला मौका देते हैं। हालांकि, शुरुआती चमक का मतलब कभी-कभी लंबे समय में सोना भी हाथ लग सकता है। उदाहरण के लिए जोर-शोर से प्रचार के बावजूद होनासा कंज्यूमर के शेयरों की लिस्टिंग फीकी रही। यह आश्चर्यजनक नहीं है, बल्कि आईपीओ के जोखिमों के बारे में एक चेतावनी है। हालांकि, इस समय इसका शेयर आईपीओ के भाव से 20 फीसदी ऊपर है। ऐसे कई सारे आईपीओ शुरुआत में फीके रहे, लेकिन लंबे समय में वे कई गुना मुनाफा दिए हैं। इसका मतलब अगर कंपनी अच्छी है तो वह आपको लंबे समय में फायदा दे सकती है। 

ऐसा नहीं है कि बड़ी कंपनी है तो उसके आईपीओ में फायदा मिलेगा ही। उदाहरण के लिए सबसे बड़े इश्यू और भावनात्मक अपील के बावजूद एलआईसी का शेयर 18 महीने बाद भी आईपीओ के भाव से नीचे है। 2008 में आया अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस पावर का आईपीओ भी कुछ इसी तरह का रहा है। कल्याण जूलर्स और पेटीएम की हालिया लिस्टिंग की भी हालत यही रही है। यह शेयर भी आईपीओ के भाव पर नहीं पहुंच पाया है। इसका मतलब कि लोकप्रियता शेयर बाजार में सफलता की गारंटी नहीं देती। 

लिस्टिंग के बाद अक्सर कंपनियों को लेकर अधिक स्पष्टता होती है। किसी कंपनी की वित्तीय स्थिति, बुनियादी बातें और बाजार में प्रदर्शन का पता बाद में चलता है। लिस्टिंग के बाद आईपीओ की तुलना में कंपनी के मूल्य की बेहतर स्थिति का पता चलता है। ऐसे में आईपीओ के जाल में फंसने के बजाय कंपनी के प्रदर्शन के आधार पर अधिक जानकारी भरा निर्णय ले सकते हैं। इस समय के इश्यू मुख्य रूप से कंपनी के विकास के लिए धन जुटाने के बजाय ज्यादातर आईपीओ मौजूदा शेयरधारकों को निकलने के लिए मौका देते हैं। यह बदलाव आईपीओ के माध्यम से नए निवेशकों के लिए वास्तविक मूल्य पर सवाल उठाता है। 

नायका, जोमैटो, पेटीएम और पॉलिसी बाजार नई उम्र की कंपनियां हैं। इन सभी के शेयर आईपीओ की तुलना में नीचे हैं या बहुत ज्यादा फायदा नहीं दिए हैं। शुरुआत में नायका और जोमैटो ने जरूर मुनाफा दिया, पर अब इनके शेयर डिस्काउंट पर हैं। ऐसी स्थिति में किसी कंपनी के शेयर में निवेश करने से पहले उसके बाजार प्रदर्शन, प्रबंधन निर्णय और वित्तीय विकास पर नजर रखना जरूरी है। यह आपको बेहतर जानकारी दे सकता है। साथ ही किसी गलत निर्णय लेने से आप बच सकते हैं। 

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