बड़े देशों में सबसे तेज बढ़ी हमारी जीडीपी, चीन की दूसरी तिमाही में 4.9 फीसदी 

मुंबई- पश्चिमी देशों में मंदी की आशंका और चीन में आर्थिक सुस्ती के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था ने दूसरी तिमाही में सभी अनुमानों को पीछे छोड़ते हुए 7.6 फीसदी की दर से विकास हासिल की है। हमारी जीडीपी दुनिया के बड़े देशों की तुलना में सबसे ज्यादा तेजी से बढ़ी है। इस दौरान चीन की विकास दर केवल 4.9 फीसदी रही है। 

भारत की जीडीपी जुलाई-सितंबर यानी दूसरी तिमाही में 7.6 फीसदी की दर से बढ़ी है। एक साल पहले समान तिमाही में यह 6.2 फीसदी की दर से बढ़ी थी। पिछली तिमाही (अप्रैल-जून) में यह चार साल के उच्च स्तर 7.8 फीसदी पर रही थी। इस दौरान नॉमिनल जीडीपी का अनुमान 71.66 लाख करोड़ रुपये का है। जो 2022-23 में 65.67 लाख करोड़ की तुलना में 9.1 फीसदी ज्यादा है।
 

अप्रैल से सितंबर के दौरान पहली छमाही में जीडीपी का अनुमान 7.7 फीसदी बढ़कर 82.11 लाख करोड़ रहा है, जो एक साल पहले 76.22 लाख करोड़ रुपये रहा था। 2022-23 की पहली छमाही में इसमें 9.5 फीसदी की दर से बढ़त दर्ज की गई थी। अप्रैल से सितंबर के बीच वर्तमान मूल्य पर हमारी अर्थव्यवस्था का आकार 142.33 लाख करोड़ रुपये आंका गया है। एक साल पहले के 131.09 लाख करोड़ रुपये की तुलना में यह अनुमान 8.6 फीसदी अधिक है। 2022-23 में इसी अवधि में यह 22.2 फीसदी बढ़ा था। 

ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट, कम्युनिकेशन एवं सेवा से संबंधित गतिविधियों में दूसरी तिमाही में सुस्ती दिखी। एक साल पहले इसमें 15.6 फीसदी वृद्धि थी, जो दूसरी तिमाही में 4.3 फीसदी रही है। कृषि, मछली पालन की विकास दर 2.5 फीसदी से घटकर 1.2 फीसदी रह गई। इलेक्ट्रिसिटी, गैस, पानी आपूर्ति और अन्य उपयोगिता सेवाओं की विकास दर 10.1 फीसदी रही, जो एक साल पहले छह फीसदी रही थी। 

दूसरी तिमाही में जीवीए में 7.4% की बढ़त रही। ग्रॉस वैल्यू एडेड यानी जीवीए से यह पता चलता है कि एक तय अवधि में इनपुट लागत और कच्चे माल का दाम निकालने के बाद कितने रुपये की वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन हुआ। यह भी पता चलता है कि किस खास क्षेत्र में कितना उत्पादन हुआ है।

देश का राजकोषीय घाटा अप्रैल से अक्तूबर में 8.03 लाख करोड़ रहा है। यह सरकार के पूरे साल के बजट लक्ष्य का 45 प्रतिशत है। पिछले साल 45.6 प्रतिशत था। 2023-24 के लिए सरकार ने 17.86 लाख करोड़ या जीडीपी का 5.9 फीसदी के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य रखा है। सरकार के खर्च और राजस्व के बीच के अंतर को राजकोषीय घाटा कहते हैं। कुल राजस्व में 13.02 लाख करोड़ टैक्स और 2.66 लाख करोड़ गैर टैक्स रहा। गैर टैक्स राजस्व इसलिए बढ़ा, क्योंकि आरबीआई ने सरकार को 87,416 करोड़ देने की मंजूरी दी थी। 

आठ प्रमुख इन्फ्रा क्षेत्रों की वृद्धि दर अक्तूबर में 12.1 प्रतिशत रही है। एक साल पहले यह 0.7 प्रतिशत बढ़ी थी। खाद को छोड़कर सारे सेक्टरों का उत्पादन बेहतर रहा है। सितंबर में इनकी विकास दर 9.2 फीसदी रही थी। अप्रैल से अक्तूबर के दौरान 8.6 फीसदी रही है जो एक साल पहले 8.4 फीसदी रही थी। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में इन आठों का योगदान 40 फीसदी है। 

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