दुनिया के दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे के राइट हैंड चार्ली मुंगेर का निधन

मुंबई- दुनिया के सबसे बड़े इन्वेस्टर वॉरेन बफे के राइट हैंड कहे जाने वाले बिलेनियर चार्ली मंगर का मंगलवार (28 नवंबर) को निधन हो गया। वे 99 साल के थे। उन्होंने कैलिफोर्निया में सांता बारबरा के एक अस्पताल में आखिरी सांस ली। बफे की इन्वेस्टमेंट फर्म बर्कशायर हैथवे ने यह जानकारी दी। 

वॉरेन बफे का राइट हैंड बनने से पहले ही चार्ली का वेल एस्टैबलिश्ड लॉ करियर था। बर्कशायर हैथवे में वे वाइस चेयरमैन थे। उनका लॉस एंजिल्स में घर था। फोर्ब्स की 2023 की लिस्ट के अनुसार उनकी नेटवर्थ करीब 21.6 हजार करोड़ रुपए थी। 

चार्ली का सक्सेस फॉर्मूला: बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी लें, फिर इंतजार करें अपनी सक्सेस का फॉर्मूला बताते हुए चार्ली मंगर कहते थे, ‘एक सिंपल आइडिया लें और इसे गंभीरता से लें। वहीं हर समय हर चीज के बारे में सब कुछ जानने का दिखावा करने की बजाय आपके पास जो बहुत कम इनसाइट है, उस पर ही फोकस करें।’ 

उन्होंने हमेशा लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट करने और धैर्य रखने पर जोर दिया। हाल के दशकों में इस अप्रोच की इन्वेस्टर्स में कमी आई है। वे निवेशकों को बड़ी कंपनियों में हिस्सेदारी लेने और फिर प्रॉफिट के लिए इंतजार करने की सलाह देते थे। चार्ली मंगर और वॉरेन बफे 2015 में ओमाहा में बर्कशायर हैथवे की शेयरहोल्डर मीटिंग में बड़ी स्क्रीन पर दिखाई दिए। 

चार्ली का जन्म ओमाहा में 1 जनवरी 1924 को अल्फ्रेड और फ्लोरेंस मंगर के घर हुआ था। उन्होंने सेकेंड वर्ल्ड वॉर के दौरान सेना में रहते हुए मौसम विज्ञान की पढ़ाई की और हार्वर्ड लॉ स्कूल से ग्रेजुएशन किया। सेना में बिताया समय उन्हें कैलिफोर्निया ले गया, जहां उन्होंने अपना घर बनाया। लॉ प्रैक्टिस और रियल एस्टेट निवेश से उन्होंने अपना पहला मिलियन डॉलर कमाया। 

चार्ली को जब पहली बार फोर्ब्स की बिलेनियर लिस्ट में शामिल किया गया था, तो उन्होंने बताया था कि वे वॉरेन बफे के साथ लंबे समय से जुड़े हैं। वहीं चार्ली ने साल 2000 में अपनी बायोग्राफी डेमन राइट में बताया था कि वॉरेन की तरह उनमें भी अमीर बनने का काफी जुनून था। इसलिए नहीं कि उन्हें फेरारी चाहिए थी, बल्कि वे आजादी चाहते थे। वे इसे शिद्दत से चाहते थे। 

दोनों पॉपुलर इन्वेस्टर 1959 तक नहीं मिले थे, भले ही वे एक ही शहर में पले-बढ़े। 1930 के दशक में चार्ली ने बफे एंड सन ग्रॉसरी स्टोर में काम जरूर किया था। 1959 में बफे एक परिवार से इन्वेस्टमेंट कराने की कोशिश कर रहे थे। आखिरकार उन्हें एक लाख डॉलर का चेक मिल गया। परिवार ने कहा कि निवेश का फैसला उन्होंने इसलिए लिया क्योंकि बफे ने उन्हें चार्ली मंगर की याद दिलाई। वह परिवार चार्ली मंगर को जानते थे। इसके बाद कपल के बच्चों ने बफे और चार्ली दोनों के लिए डिनर का आयोजन किया। यह समय काफी अहम था, क्योंकि बफे के गुरु ग्राहम, हाल ही में रिटायर हुए थे और बफे को एक नए पार्टनर की जरूरत थी, जिसके साथ वे इन्वेस्टमेंट आइडियाज पर चर्चा कर सकें। 

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