निफ्टी 72 दिन बाद फिर 20,000 पर, पूंजीकरण पहली बार 4 ट्रिलियन डॉलर

मुंबई- त्योहारों में चार लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के कारोबार के बाद ऑटो की बिक्री जहां अब तक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, वहीं देश की अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार में भी जबरदस्त तेजी है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी 72 दिन बाद फिर से 20,000 के पार हो गया है। 18 सितंबर को यह 20,133 पर बंद हुआ था। बीएसई पर सूचीबद्ध कंपनियों का पूंजीकरण पहली बार 4 लाख करोड़ डॉलर के पार यानी 333.29 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। 

बुधवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक 727.71 अंक या 1.10 प्रतिशत बढ़कर 66,901.91 पर बंद हुआ। एनएसई 206.90 अंक या 1.04 प्रतिशत बढ़कर 20,096.60 पर बंद हुआ। बीएसई के 30 में से 26 शेयर बढ़त में और चार गिरावट में रहे। बढ़ने वाले प्रमुख शेयरों में एक्सिस बैंक, महिंद्रा एंड महिंद्रा, विप्रो, टाटा मोटर्स, एचडीएफसी बैंक और टेक महिंद्रा रहे। गिरने वालों में अल्ट्राटेक, बजाज फिनसर्व और टाइटन रहे। बीएसई पर 3,841 शेयरों में कारोबार हुआ। इसमें 1,916 बढ़त में और 1,786 गिरावट में रहे। एनएसई के 50 में से 40 शेयर बढ़त में और 10 गिरावट में रहे। इसके प्रमुख इंडेक्स नेक्स्ट50, मिडकैप, फाइनेंशियल और बैंक तेजी में रहे। 

बीएसई में कुल 5,168 कंपनियां सूचीबद्ध हैं। इनके पास 333 लाख करोड़ रुपए का मार्केट कैप है। इसमें से 80 लाख करोड़ रुपये केवल दस कंपनियों के पास हैं। इनमें सबसे ज्यादा रिलायंस का मार्केट कैप 16.24 लाख करोड़, टीसीएस का 12.85 लाख करोड़, एचडीएफसी बैंक का 11.83 लाख करोड़, एचयूएल का 5.93 लाख करोड़, आईसीआईसीआई बैंक का 6.58 लाख करोड़, इन्फोसिस का 6.05 लाख करोड़ रुपये, एयरटेल का 5.59 लाख करोड़ और आईटीसी का 5.45 लाख करोड़ रुपये है।  

बाजार पूंजीकरण बढ़ने में स्मॉल और मिड कैप कंपनियों का बड़ा योगदान रहा है। इस साल स्मॉलकैप शेयरों मे 38 प्रतिशत और मिडकैप शेयरों ने 34 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। साथ ही इस साल 43 नई कंपनियां बाजार में आईपीओ लाकर लिस्ट हुई हैँ। इस साल निफ्टी और सेंसेक्स में करीब 10 प्रतिशत की तेजी और इस दौरान बाजार पूंजीकरण 51 लाख करोड़ रुपये के करीब बढ़ा। जबकि विदेशी निवेशकों ने एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के शेयर खरीदे।  

बीएसई का बाजार पूंजीकरण पहली बार एक लाख करोड़ डॉलर 28 मई 2007 को हुआ था। फिर दो लाख करोड़ डॉलर पहुंचने में इसे 10 साल लगे और 10 जुलाई 2017 को यह पहुंचा। तीन लाख करोड़ होने में केवल 4 साल लगे और मई, 2021 को यह आंकड़ा पार किया। पर चार लाख करोड़ का आंकड़ा केवल ढाई साल में ही पार कर लिया।  

वैश्विक ब्रोकरेज हाउस सीएलएसए ने कहा है कि 2052 तक अमेरिका और चीन जैसी अर्थव्यवस्थाओं को पीछे छोड़कर भारत सबसे बड़ी इकनॉमी बनेगा। उस समय हमारी अर्थव्यवस्था 45 लाख करोड़ डॉलर की होगी। 2047 तक जापान को पीछे छोड़ कर तीसरे स्थान पर भारत होगा। 2047 तक हमारी इकनॉमी का आकार 29 लाख करोड़ डॉलर होगा। जब जीडीपी यहां से दोगुना होगी तो बाजार पूंजीकरण भी उसका दोगुना हो जाएगा। 

विश्व के दिग्गज निवेशकों क्रिस वुड और मार्क मोबियस ने कहा, सेंसेक्स और निफ्टी अगले पांच साल में दोगुना हो जाएंगे। सेंसेक्स पांच वर्षों में एक लाख को पार कर जाएगा। जेपी मॉर्गन ने पिछले महीने कहा था कि निवेशक किसी भी निकट अवधि की गिरावट में खरीदारी करें। सरकार ने पहली छमाही में 4.91 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है। दूसरे विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों को उचित कीमत के गुणवत्ता वाले स्टॉक खरीदने चाहिए। धैर्यपूर्वक इंतजार करना चाहिए। विधानसभा चुनाव नतीजे आने के बाद बाजार में बड़ी तेजी आने की संभावना है। 

देश की शीर्ष कंपनियों का बाजार पूंजीकरण में 40 प्रतिशत योगदान है। इनकी कुल पूंजी 195 लाख करोड़ रुपये है। अप्रैल से अब तक इनकी पूंजी 17 प्रतिशत बढ़ी है। बाजार पूंजीकरण में भारत पांचवें स्थान पर है। पहले पर 47.78 लाख करोड़ डॉलर के साथ अमेरिका, दूसरे पर 9.74 लाख करो़ड़ डॉलर के साथ चीन और तीसरे पर जापान है। चौथे पर हांगकांग है।  

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