म्यूचुअल फंड बन रहा घरेलू बचत का पसंदीदा साधन, एफडी से ज्यादा निवेश 

मुंबई- हाल के समय में बाजार की तेजी से घरेलू बचत का हिस्सा अब बैंकों के जमा के बजाय म्यूचुअल फंडों में जा रहा है। निवेशक अब इक्विटी फंड में पैसे लगा रहे हैं। साथ ही उनको अच्छा रिटर्न मिल रहा है।  

बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2021 में म्यूचुअल फंडों में कुल निवेश 64,000 करोड़ रुपये आया था। 2022 में यह बढ़कर 1.60 लाख करोड़ और 2023 में यह 1.79 लाख करोड़ रुपये हो गया। वित्तीय बचत में घरेलू बचत का हिस्सा भी इसी तरह से वित्त वर्ष 2021 में 7.6 फीसदी था। 2022 में यह बढ़कर 8.5 फीसदी और 2023 में यह 8.4 फीसदी पर रहा।  

चालू वित्त वर्ष के पहले सात महीने अप्रैल से अक्तूबर) में म्यूचुअल फंड में निवेशकों के निवेश का मूल्य यानी एयूएम बढ़कर 46.72 लाख करोड़ रुपये हो गया। 2023 में यह 39.42 लाख करोड़ और 2022 में 37.57 लाख करोड़ रुपये था। अप्रैल से अक्तूबर तक के आंकड़ों के रुझान बताते हैं कि इक्विटी और वृद्धि केंद्रित योजनाओं का म्यूचुअल फंड में सर्वाधिक हिस्सा रहा है।  

डेट स्कीम का मार्च, 2022 तक 34 फीसदी हिस्सा था जो कि इस साल अक्तूबर तक घटकर 29 फीसदी पर आ गया। इसी तरह इक्विटी और वृद्धि योजनाओं का हिस्सा 36.3 फीसदी बढ़कर 40.2 फीसदी पर पहुंच गया। इसका मतलब निवेशक इक्विटी फंड में तेजी से पैसा लगा रहे हैं। इस वित्त वर्ष में तीन नवंबर तक बैंक जमा की वृद्धि दर 8.5 फीसदी रही, जबकि म्यूचुअल फंड की वृद्धि दर 18.5 फीसदी रही। इसमें भी इक्विटी की वृद्धि दर 23.9 फीसदी रही है। 

मल्टी एसेट एलोकेशन फंड, म्यूचुअल फंड का एक ऐसा साधन है जो आपके 100 रुपये के निवेश को कई क्षेत्रों में फैलाता है। यानी यह लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप शेयरों में निवेश करने के साथ ही सोना और अन्य साधनों में भी निवेश करता है। इसका मकसद यह होता है कि अगर एक साधन में आपको घाटा हो रहा है तो दूसरा उससे बचाता है।  

सोना जहां एक सुरक्षित निवेश है वहीं डेट और एक्सचेंज ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव्स/गोल्ड ईटीएफ रिट और इनविट्स में भी निवेश किया जाता है। लंबी अवधि में रिटर्न उत्पन्न करने के प्रयास में इस फंड की निवेश रणनीति एक बेहतरीन रिटर्न देती है। यह फंड अपनी संपत्ति का कम से कम 10 फीसदी तीन या अधिक परिसंपत्ति वर्गों में निवेश करता है। 

आंकड़े बताते हैं कि इस फंड ने पिछले 21 वर्षों में सालाना आधार पर 21 फीसदी की दर से रिटर्न दिया है। ल्यू रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार सबसे बड़े मल्टी एसेट एलोकेशन फंडों में से एक आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल मल्टी-एसेट फंड का 30 सितंबर, 2023 तक एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) 24,060.99 करोड़ रुपये था। इस स्कीम की स्थापना के समय अर्थात 31 अक्तूबर, 2002 को 10 लाख रुपये का एकमुश्त निवेश 30 सितंबर, 2023 तक 21 फीसदी सीएजीआर की दर से लगभग 5.49 करोड़ रुपये हो गया है। 

म्यूचुअल फंड में एक टीम यह निर्धारित करती है कि पैसे का निवेश कैसे किया जाए। इक्विटी, डेट और कमोडिटी एसेट क्लास के फंड मैनेजर टीम बनाते हैं और वे एक साथ निवेश पर फैसला लेते हैं। इससे स्कीम से फंड मैनेजरों की एसेट क्लास निर्धारित करने की योग्यता और उनकी विशेषज्ञता से निवेशकों का लाभ होता है। पिछले दशक और उसके बाद के कई एसेट क्लास के प्रदर्शन से पता चलता है कि शीर्ष प्रदर्शन करने वाली संपत्तियां हर दूसरे वर्ष बदलती रहती हैं। इस परिदृश्य में किसी के निवेश को एसेट क्लासों में बांटना लाभ कमाने का एक तरीका है, ताकि पूरा पोर्टफोलियो हर एसेट क्लास द्वारा प्रदान किए जाने वाले संभावित लाभों का फायदा उठा सके। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *