चुनावों के कारण चालू वित्त वर्ष में पूंजीगत खर्च से चूक सकते हैं कई राज्य 

मुंबई- राज्यों के हालिया विधानसभा चुनावों और अगले साल आम चुनाव के साथ राजस्व में गिरावट से चालू वित्त वर्ष में कई राज्य अपने पूंजीगत खर्च लक्ष्य से चूक सकते हैं। इक्रा की रिपोर्ट के अनुसार, पहली छमाही में राज्यों का पूंजीगर्त खर्च रिकॉर्ड 35 प्रतिशत तक बढ़ गया था। दूसरी छमाही में इसके घटने की आशंका है। 

रिपोर्ट के अनुसार, अपने बजट अनुमानों को बनाए रखने के लिए 21 राज्यों को यह सुनिश्चित करना होगा कि दूसरी छमाही में पूंजीगत खर्च की दर 28 प्रतिशत पर बनी रहे। हालांकि, यह आचार संहिता के बाद से संभव नहीं है। आम चुनाव से पहले मार्च तिमाही में आचार संहिता लग सकती है। रिपोर्ट में अरुणाचल प्रदेश, असम, गोवा, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम और नागालैंड शामिल नहीं हैं। 

इन 21 राज्यों का संयुक्त राजस्व और राजकोषीय घाटा अप्रैल-सितंबर की अवधि में क्रमशः 70,000 करोड़ रुपये और 3.5 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ गया। एक साल पहले की अवधि में यह क्रमशः 50,000 करोड़ रुपये और 2.4 लाख करोड़ रुपये था। समीक्षाधीन अवधि में इन 21 राज्यों का संयुक्त राजस्व व खर्च की वृद्धि बजट अनुमानों से कम रहा। 

इसके अलावा, राजस्व प्राप्तियां और खर्चदोनों ही राज्यों के बजट अनुमानों में दिखाए गए 18-19 प्रतिशत से पीछे हैं। हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, केरल, पंजाब और बंगाल को छोड़कर बाकी 16 राज्यों का पूंजीगत खर्च दस फीसदी से ज्यादा रहा है। 

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