अवैध सट्टेबाजी से सालाना दो लाख करोड़ की कर चोरी, क्रिकेट विश्वकप तेजी 

मुंबई- जैसे-जैसे क्रिकेट विश्व कप रफ्तार पकड़ रहा है, अवैध सट्टेबाजी गतिविधियां भी तेजी से बढ़ रही हैं। अनौपचारिक रास्तों के माध्यम से करोड़ों रुपये का निवेश भी किया गया है। इससे कर अधिकारियों को सालाना लगभग दो लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। थिंक चेंज फोरम (टीसीएफ) की रिपोर्ट के अनुसार, अवैध खेल सट्टेबाजी बाजार को भारत से प्रति वर्ष 8,20,000 करोड़ रुपये मिल रहा है। 

रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल बुनियादी ढांचे में वृद्धि, स्मार्टफोन का उपयोग और एथलेटिक स्पर्धाओं के विस्तार जैसे कारकों ने इस तरह के की सट्टेबाजी में ज्यादा योगदान दिया है। नियामकीय प्रतिबंधों के बावजूद, भारत के अवैध सट्टेबाजी और जुआ बाजार में तेजी से वृद्धि देखी गई है। इस तरह की सट्टेबाजी पर 28 फीसदी जीएसटी लागू है। ऐसे में 8,20,000 करोड़ रुपये की सट्टेबाजी पर 2.29 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी बैठता है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि ऐसी गतिविधियों को प्रतिबंधित करने के लिए अवैध ऑफशोर सट्टेबाजी गतिविधियों की निगरानी के लिए एक टास्क फोर्स की स्थापना करने की जरूरत है। साथ ही नई जीएसटी व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाए। कानूनी गेमिंग प्लेटफॉर्म से ऑफशोर प्लेटफॉर्म पर जाने वाली रकम की रक्षा के लिए ऑफशोर ऑपरेटरों को भारत में पंजीकरण करने के लिए अनिवार्य किया जाए। अगर ऐसा नहीं होता है तो सरकार को आगे और ज्यादा घाटा हो सकता है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के एक्सचेंज नियंत्रण नियमों के तहत सट्टेबाजी और जुए के लेन-देन पर प्रतिबंध के कारण विदेशी जुआ कंपनियां देश के भीतर और बाहर पैसे ले जाने के लिए गुप्त तरीके अपनाती हैं। फंड को हवाला, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य अवैध चैनलों जैसे तरीकों के माध्यम से बाहर भेजा जाता है। इन फंडों से देश की वित्तीय स्थिरता को तो खतरा होगा ही साथ ही अवैध गतिविधियों को भी मदद मिलेगी जिससे सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा कमजोर हो सकती है। 

रिपोर्ट के अनुसार, 75 से अधिक सट्टेबाजी और जुआ साइटें हैं जो विशेष रूप से भारतीय आबादी पर फोकस करती हैं। इनमें से कई कानूनी प्रतिबंधों के बावजूद चलाई जाती हैं। कई साइटों को तो फिल्मी सितारे और अन्य प्रसिद्ध लोग प्रचार करते हैं। 

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