इस साल सुधारित विनिवेश लक्ष्य भी सरकार के लिए पूरा करना होगा मुश्किल 

मुंबई- चालू वित्त वर्ष के खत्म होने में अब महज 21 दिन बचे हैं। ऐसे में सरकार के लिए विनिवेश की सुधारित रकम भी हासिल करना मुश्किल लग रहा है। अब तक विनिवेश से 31,106 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं, जबकि सुधारित लक्ष्य 50,000 करोड़ रुपये था। हालांकि, बजट में यह लक्ष्य 65 हजार करोड़ रुपये का था। 

बैंक ऑफ बड़ौदा की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस 31 हजार करोड़ में से अकेले एलआईसी से ही 20,516 करोड़ रुपये आए हैँ। जबकि ओएनजीसी से 3,059, आईआरसीटीसी से 2,724 और एक्सिस बैंक से 3,939 करोड़ रुपये आए हैं। सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए 51,000 करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य रखा है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर सरकार सभी सरकारी संस्थानों में अपनी हिस्सेदारी 51 फीसदी पर लाती है और 49 फीसदी तक बेचती है तो इससे उसे 3.5 लाख करोड़ रुपये मिल सकते हैं, लेकिन यह सेंसेक्स के 60 हजार के भाव पर आधारित है। आगे बाजार में गिरावट आती है इस रकम में और कमी हो सकती है। इसमें से 1.70 लाख करोड़ कंपनियों से और 1.80 लाख करोड़ वित्तीय संस्थानों से आ सकता है। 

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सरकार हिस्सेदारी घटाती है तो इससे उसके लाभांश पर असर पड़ेगा जो कम हो जाएगा। फिलहाल सरकार को 50 हजार करोड़ सालाना लाभांश इन कंपनियों से मिल रहा है। सेंसेक्स के अभी के स्तर से सरकार की कंपनियों में जो हिस्सेदारी है, उसका बाजार पूंजीकरण 17 लाख करोड़ है और जब हिस्सेदारी घटकर 51 फीसदी हो जाएगी तो इसमें और कमी आ सकती है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर सरकार कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी 51 फीसदी तक घटाती है तो इससे हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लि. से 23,120 करोड़ और कोल इंडिया से 20,966 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। ओएनजीसी से 18,720 और इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन से 12,968 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। सबसे ज्यादा एसबीआई से 32,433 करोड़ रुपये मिल सकते हैं।  

एसबीआई में 6.5 फीसदी हिस्सेदारी घटानी होगी। जबकि इंडियन ओवरसीज बैंक में 45.4 फीसदी हिस्सा घटाने पर 21,539 करोड़, यूनियन बैंक में 32.5 फीसदी हिस्सा घटाने पर 16,305 करोड़, यूको बैंक में 44.4 फीसदी घटाने पर 14,420 करोड़, पंजाब नेशनल बैंक में 22.10 फीसदी हिस्सा घटाने पर सरकार को 12,557 करोड़ रुपये मिल सकते हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा से 11,671 करोड़ और इंडियन बैंक से 10,468 करोड़ रुपये मिल सकते हैं।  

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