जानिए मोदी सरकार के दसवें बजट में किसे क्या मिला, चुनाव पर फोकस 

मुंबई- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में एनडीए सरकार ने लगातार दसवां बजट पेश किया है। बजट से पहले सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी कि वह कौन सा रास्ता चुने। एक रास्ता लोकलुभावन बजट का था, जो कोविड के बाद आम लोगों के लिए कई सौगात की ओर ले जाता। दूसरा रास्ता, आर्थिक सुस्ती और भविष्य में उठापटक की आशंका के बीच रक्षात्मक रुख के साथ संतुलन बनाने की ओर जाता था।  

सरकार ने दूसरा रास्ता चुना। ऐसा इसलिए भी कि भले 2024 में पूर्ण बजट नहीं होगा, लेकिन लोकलुभावन बजट का विकल्प खुला रहेगा। साल 2019 के अंतरिम बजट में भी सरकार ने कई बड़े फैसले किए थे। इस बजट से सरकार ने पांच सियासी और आर्थिक संदेश देने की कोशिश की है। 

कुछ वर्षों में मिडल क्लास ने जिस तरह राजनीति में रुचि बढ़ाई है और नैरेटिव बनाने में जिस तरह इस तबके की भूमिका सामने आई है। उसके अनुरूप इस वर्ग को सरकार से उम्मीद के मुताबिक, सौगात नहीं मिली थी। लेकिन इस बजट में इस वर्ग को भी काफी कुछ मिला है। इनकम टैक्स स्लैब में बड़े बदलाव और नौकरियों पर जोर से सरकार ने मिडिल क्लास को संबोधित करने की कोशिश की है। 

सरकार ने बजट में गरीबों पर पूरा फोकस रखा। बीजेपी की लगातार मजबूत सियासी स्थिति में गरीब वोटरों का बड़ा योगदान रहा है। ऐसे में इस बजट में मुफ्त अनाज, हर घर जल, सभी को घर से जुड़ी योजनाओं के जरिए सरकार ने इस तबके पर अपनी पकड़ बनाए रखने की पूरी मंशा दिखाई है। जिस तरह बीते कुछ महीनों से सरकार ने आदिवासी समुदाय के बीच अपनी कमजोर होती पकड़ को मजबूत करने की कोशिश की है, उसकी भी झलक इस बजट में दिखी।

बजट में खेती और किसान पर भी जोर रहा। दरअसल बीते कई वर्षों से किसानों का मोदी सरकार के साथ रिश्ता उतार-चढ़ाव भरा रहा है। साल 2019 से पहले जब पूरे देश में अलग-अलग किसान आंदोलन हुए, तब किसान सम्मान निधि का एलान हुआ, जिसका लाभ तब चुनाव में मिला। इस बार खेती के कर्ज का लक्ष्य 2023-24 के लिए बढ़ाकर 20 लाख करोड़ रुपये किया गया है। लेकिन कई मदों में कटौती भी की गई। 

बजट से पहले किसान सम्मान निधि बढ़ाने की चर्चा थी। सुगबुगाहट यह भी थी क्या विपक्ष के दबाव में सरकार पुरानी पेंशन की वापसी का संकेत देगी? लेकिन सरकार ने परहेज किया। कोई बड़ी मुफ्त योजना का ऐलान भी नहीं किया। दरअसल पिछले दिनों पीएम ने रेवड़ी कल्चर के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। ऐसे में बजट में इन चीजों से परहेज किया गया। मुफ्त राशन को जरूर जारी रखा गया, लेकिन फूड सब्सिडी में कमी की भी बात कही गई। 

सरकार ने सकारात्मक संदेश देने की भी पूरी कोशिश की, लेकिन भविष्य की आर्थिक अनिश्चितता का साफ असर भी बजट पर दिखा। वैश्विक मंदी की आशंका के बीच सरकार ने कोई बड़ा जोखिम लेने से परहेज किया। साथ ही, ऐसे फैसलों से भी दूरी रखी जो बाजार का सेंटिमेंट कमजोर करे। वित्तीय घाटे को काबू में रखने की मंशा दिखाई गई। इन कदमों को आने वाले दिनों में किसी भी सूरत से निपटने की तैयारी के रूप में देखा गया।

 

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