हर दिन टेक कंपनियां कर रही हैं 3,000 कर्मचारियों की छंटनी

नई दिल्ली। भारत सहित वैश्विक स्तर पर जनवरी बेरोजगारी के मामले में बुरा साबित हो रहा है। हर दिन टेक कंपनियों में से औसतन 3,000 लोगों की नौकरी जा रही है। वैश्विक आर्थिक संकट और मंदी की चिंताओं के बीच छंटनी की रफ्तार और तेज होने की आशंका है। अब तक 166 टेक कंपनियों ने 65,000 से ज्यादा कर्मचारियों की छंटनी की है। गूगल की मूल कंपनी अल्फाबेट ने 12,000 कर्मचारियों को निकालने का ऐलान किया है। माइक्रोसॉफ्ट ने 10 हजार नौकरियों को खत्म करने की घोषणा की है। अमेजन ने भी 18,000 लोगों को निकालने की घोषणा की है। इसमें से एक हजार भारत में काम कर रहे हैं। साल, 2022 में एक हजार से ज्यादा कंपनियों ने 154,336 लोगों को नौकरी से निकाला था। भारत की शेयरचैट ने कुल कर्मचारियों में से 20 फीसदी या 500 लोगों को बाहर का रास्ता दिखाने की योजना बना चुकी है। टेक कंपनियों के साथ आईटी कंपनियां भी पीछे नहीं हैं। विप्रो ने 400 कर्मचारियों को उनके खराब प्रदर्शन के कारण निकाल दिया जबकि स्विगी ने भी 380 लोगों के बाहर करने की योजना बनाई है। इनके साथ ओला, डुंजो जैसी कंपनियां भी छंटनी की दौड़ में शामिल हो गई हैं। साइबर सिक्योरिटीज कंपनी सोफो ने भारत में 450 लोगों को बाहर करने की बात कही है जबकि लिंक्डइन ने भी छंटनी की योजना तैयार की है। भारत में एंड टू एंड डिजिटल हेल्थकेयर प्लेटफॉर्म मेडिबडी ने अपनी वर्कफोर्स में से 8 फीसदी या करीब 200 लोगों की छंटनी की है. इसमें सभी विभागों के लोग शामिल हैं।

सूरत में 31 वर्षीय एक हीरा व्यापारी विपुल जिंजला ने बृहस्पतिवार को जहर खाकर आत्महत्या कर ली। उनके भाई ने बताया कि पिछले कुछ महीने से वे आर्थिक तंगी में थे। क्योंकि बढ़ती महंगाई के साथ-साथ वेतन घट गया और ऐसे में दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल हो गया। सूरत डायमंड के अध्यक्ष रमेश जिलारिया ने कहा कि विपुल अकेले नहीं हैं। हजारों श्रमिक अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। आवास या वाहन लोन, बच्चों की स्कूल फीस और रोज के घरेलू खर्चों को पूरा करने में कामगारों को दिक्कत हो रही है। यूनियन के मोटे अनुमान के मुताबिक उत्पादन में कटौती और छोटी इकाइयों के बंद होने के कारण पिछले कुछ महीनों में करीब 10,000 हीरा श्रमिकों की नौकरी चली गई है। संघ मांग कर रहा है कि राज्य को हीरा क्षेत्र में श्रम कानूनों को सख्ती से लागू करना चाहिए, जिसे फैक्टरी अधिनियम के तहत कवर किया जाना चाहिए। श्रमिकों को भविष्य निधि, निश्चित काम के घंटे और अन्य सामाजिक व स्वास्थ्य सुरक्षा लाभ मिलने चाहिए, जो नहीं मिल रहे हैं।उनका कहना है कि वर्तमान में हीरा श्रमिकों के पास कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं है, क्योंकि वे पंजीकृत कर्मचारी नहीं हैं। वेतन पर्ची नहीं मिलती है। आयकर रिटर्न भी दाखिल नहीं कर रहे हैं। इसलिए उन्हें अन्य लाभ भी नहीं मिलते हैं।

जेम्स एंड जूलरी प्रमोशन काउंसिल के क्षेत्रीय चेयरमैन विजय मंगुकिया बताते हैं कि यह सच है कि उत्पादन में 20 से 21 फीसदी की कमी आई है, क्योंकि क्रिसमस के दौरान अमेरिका और अन्य देशों से आयात में 18 फीसदी की गिरावट आई थी। आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2022 में देश का तैयार हीरा निर्यात 235.70 करोड़ डॉलर रहा, जो दिसंबर 2021 के 290 करोड़ डॉलर के निर्यात से 18.90% कम है। सूरत में 3000 इकाइयां 7 लाख श्रमिकों को रोजगार दे रही हैं।

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