यस बैंक के निवेशकों को राहत, राइट ऑफ का फैसला कोर्ट ने किया खारिज 

मुंबई। यस बैंक के टियर-1 बॉन्ड में बैंक और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को जोरदार झटका लगा है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने शुक्रवार को इन दोनों के राइट ऑफ के फैसले को खारिज कर दिया। इससे अब निवेशकों को राहत मिली है। कोर्ट ने यस बैंक को 6 हफ्ते के भीतर इस आदेश को लागू करने को कहा है। 

दरअसल, यस बैंक ने 2016-19 के बीच करीब 8,415 करोड़ रुपये का टियर-1 (एटी) बॉन्ड जारी किया था और इसे नाम दिया था सुपर एफडी। इस पर 9 से 9.50 फीसदी सालाना ब्याज मिल रहा था। इसमें 1,300 खुदरा निवेशकों के अलावा निप्पॉन, फ्रैंकलिटन टेंपल्टन, यूटीआई और बड़ौदा एसेट जैसी म्यूचुअल फंड की 32 योजनाओं और संस्थागत निवेशक थे। 2020 में यस बैंक जब मुश्किल में फंसा तो इस बॉन्ड को राइट ऑफ यानी बट्टा खाता में डाल दिया गया। 

इसके बाद निवेशकों ने आरबीआई से इसकी शिकायत की और आरबीआई ने भी राइट ऑफ को स्वीकार कर लिया। इसके बाद मामला बॉम्बे हाईकोर्ट में पहुंचा और शुक्रवार को कोर्ट ने यस बैंक और आरबीआई के राइट ऑफ के फैसले को खारिज कर दिया। हालांकि, यस बैंक ने पहले कहा था कि उसके नियम एवं शर्तों में ही यह लिखा था कि किसी असफल के मामले में यह निवेश राइट ऑफ हो जाएगा। निवेशकों ने कहा कि उन्हें ऐसा नहीं पता था। 

एटी-1 बॉन्ड मूलरूप से ज्यादा ब्याज देते हैं लेकिन इनकी कोई परिपक्वता अवधि नहीं होती है। हालांकि, इसमें काफी ज्यादा जोखिम होता है। निवेशकों का कहना है कि इसे सुपर एफडी के नाम से बेचा गया और यस बैंक के कर्मचारियों ने सामान्य एफडी की तुलना में ज्यादा ब्याज देने और सुरक्षा का वादा किया। इस वजह से ज्यादातर इसी बैंक के ग्राहकों ने इसमें निवेश किया। सेबी ने बैंक के पूर्व संस्थापक राणा कपूर पर बॉन्ड के मिस-सेलिंग के मामले में 2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था। 

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