संगठित क्षेत्र में नौकरियों की बहार, ईपीएफओ में जुड़े 16.26 लाख सदस्य 

मुंबई- कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने नवंबर 2022 में शुद्ध आधार पर 16.26 लाख सदस्य जोड़े। श्रम मंत्रालय ने बताया कि यह आंकड़ा एक साल पहले इसी माह की तुलना में 16.5 प्रतिशत अधिक है। यह बताता है कि संगठित क्षेत्र में नौकरियां बढ़ी हैं।  

मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी ईपीएफओ के अस्थाई पेरोल यानी नियमित वेतन पर रखे जाने वाले लोगों के आंकड़ों में बताया गया है कि ईपीएफओ ने नवंबर 2022 में शुद्ध रूप से 16.26 लाख सदस्य जोड़े हैं। ईपीएफओ के आंकड़ों में निजी और सरकारी, दोनों रोजगार शामिल होते हैं। 

श्रम मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ये आंकड़े अक्टूबर 2022 के मुकाबले 25.67 अधिक है। नवंबर में जोड़े गए कुल 16.26 लाख सदस्यों में लगभग 8.99 लाख सदस्य पहली बार ईपीएफओ से जुड़े हैं। इससे पता चलता है कि ईपीएफओ में शामिल होने वाले नए सदस्यों की संख्या अक्टूबर 2022 के 7.28 लाख के मुकाबले 1.71 लाख बढ़ गई।  

नए सदस्यों में सबसे अधिक 2.77 लाख 18-21 वर्ष के आयु-समूह के हैं. इसके बाद 2.32 लाख सदस्य 22-25 वर्ष के आयु-वर्ग के हैं। नवंबर में कुल नए सदस्यों का 56.60 प्रतिशत हिस्सा आयु समूह 18-25 वर्ष का है। इससे पता चलता है कि पहली बार नौकरी चाहने वाले बड़े पैमाने पर देश के संगठित क्षेत्र के कार्यबल में शामिल हो रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक लगभग 11.21 लाख सदस्य ईपीएफओ के साथ फिर से जुड़े। 

ईपीएफओ ने अक्टूबर में शुद्ध रूप से 12.94 लाख अंशधारक जोड़े थे। आंकड़ों के मुताबिक, करीब 2,282 नए प्रतिष्ठानों ने पहली बार कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनयम, 1952 का अनुपालन शुरू किया था। पेरोल आंकड़ों की सालाना आधार पर तुलना के आधार पर अक्टूबर, 2022 में अंशधारकों की संख्या में शुद्ध रूप से 21,026 का इजाफा हुआ था. अस्थायी पेरोल आंकड़ों के अनुसार, माह के दौरान कुल 12.94 लाख अंशधारक जोड़े गए। इनमें से 7.28 लाख नए सदस्य पहली बार ईपीएफओ के सामाजिक सुरक्षा दायरे में आए थे। 

इसमें से 8.99 लाख सदस्य पहली बार जुड़े हैं। नए सदस्यों में 18-21 साल के कर्मचारियों की संख्या 2.77 लाख और 22-25 साल की संख्या 2.32 लाख है। कुल नए सदस्यों में 56.60 फीसदी की उम्र 18-25 साल है। 11.21 लाख सदस्य दोबारा ईपीएफओ से जुड़े हैं। इनमें से 1.91 लाख महिलाएं पहली बार ईपीएफओ से जुड़ीं। वहीं, राज्यों के आंकड़े देखें तो माह-दर-माह आधार पर केरल, मध्य प्रदेश और झारखंड में ईपीएफओ अंशधारक शुद्ध रूप से बढ़े। 

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