भारत में तेजी से बिक रही हैं लग्जरी कारें, लंबोरगिनी की 10 फीसदी वृद्धि 

मुंबई-कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया में आर्थिक विषमता का नया युग शुरू होता नजर आ रहा है। 2021 में दुनिया की अधिकांश लग्जरी कार कंपनियों ने रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की थी। 2022 में भी ये रुझान कायम रहा। 

एक तरफ जहां सामान्य ऑटोमोबाइल कंपनियां और खरीदार महंगे लोन, कॉम्पोनेंट्स की बढ़ती लागत और सप्लाई चेन की दिक्कत से जूझ रही थीं, वहीं लग्जरी कार कंपनियों ने एक बार फिर बिक्री का नया रिकॉर्ड बनाया। 

ब्रिटेन की लग्जरी कार कंपनी बेंटली ने 2021 के मुकाबले 2022 में 4% ज्यादा 15,174 कारें बेचीं। ये कंपनी की रिकॉर्ड बिक्री है। 2021 में बेंटली ने 31% ग्रोथ के साथ रिकॉर्ड 14,659 कारें बेची थीं। 2020 में ये आंकड़ा 11,206 रहा। एक और लग्जरी ब्रांड लेंबोरगिनी की बिक्री बीते साल 10% बढ़कर 9,233 हो गई। पोर्शे की बिक्री 3% बढ़ी और उत्तरी अमेरिका में रिकॉर्ड सेल हुई। रोल्स-रॉयस की बिक्री 8% बढ़कर 6,021 कारें हो गई।  

ग्राहकों ने रोल्स-रॉयस के लिए औसतन 5 करोड़ रुपए प्रति कार खर्च किए। इनमें से अधिकांश ऐसे थे, जिनके पास पहले से रोल्स-रॉयस या कोई अन्य लग्जरी कार है। कोविड-19 के बाद से बीते तीन साल में लग्जरी कारों की खरीद में नकद का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है।  

कॉक्स ऑटोमोटिव के चीफ इकोनॉमिस्ट जोनाथन स्मोक कहते हैं, ‘बीते साल कई धनकुबेरों ने कैश में लग्जरी कारें खरीदीं। ये ट्रेंड इस साल पहले से ज्यादा बढ़ने का अनुमान है। स्टॉक मार्केट में उतार-चढ़ाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच बड़ा कैश रिजर्व रखने वाले धनकुबेर डॉलर को लग्जरी आइटम में खपा रहे हैं।’ इस बीच ऑटो लोन 20 साल में सबसे ज्यादा महंगा हो चुका है। ये भी फाइनेंस न कराने की एक वजह है। 

लग्जरी कारों की दुनियाभर में बिक्री के आंकड़े भारत में महीने भर में बिकने वाली कारों से भी कम नजर आते हैं। लेकिन, यदि कीमत के लिहाज से देखें तो ये कई गुना ज्यादा हो सकते हैं। बेंटली, लैंबोर्गिनी, रोल्स-रॉयस जैसी कारों की औसत कीमत लगभग 4 करोड़ रुपए है। यानी इनके जैसी एक लग्जरी कार की कीमत में भारत में 100 एंट्री लेवल की कारें आ सकती हैं। 

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