एअर इंडिया की 500 विमान खरीदने की योजना पड़ सकती है खटाई में  

मुंबई- टाटा ग्रुप के पास जाने के बाद एयर इंडिया में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। कंपनी ने साथ ही 500 विमान लेने की भी योजना बनाई है। लेकिन एविएशन इंडस्ट्री के इतिहास की सबसे बड़ी डील खटाई में पड़ सकती है। इसकी वजह यह है कि इंजन बनाने वाली कंपनियां एयर इंडिया को कोई डिस्काउंट देने को तैयार नहीं है।  

अमूमन मेगा ऑर्डर्स के साथ इंजन और मेंटनेंस पर छूट मिलती है। लेकिन यहां रिपेयर के लिए रेट पर मामला फंसा हुआ है। एयर इंडिया इसके लिए हर घंटे के हिसाब से जो रेट ऑफर कर रही है, इंजन बनाने वाली कंपनियां उसे मानने के लिए तैयार नहीं हैं। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। एयर इंडिया ने एयरबस और बोइंग से 500 विमान लेने की योजना बनाई है। इसे एविशयन के इतिहास के सबसे बड़े ऑर्डर्स में से एक माना जा रहा है। 

बोइंग के लिए 737 मैक्स के लिए इंजन सप्लाई करने वाली कंपनी सीएफएम इंटरनेशनल किसी तरह का डिस्काउंट देने को तैयार नहीं है। यह जनरल इलेक्ट्रिक कंपनी और सैफरन एसए का जॉइंट वेंचर है। सीएफएम इंटरनेशनल और उसकी प्रतिद्वंद्वी कंपनी प्रैट एंड विटनी डिवीजन को बोइंग और एयरबस के नई पीढ़ी के विमानों से दिक्कत है। इन विमानों की बहुत जल्दी मरम्मत करनी पड़ रही है। इस वजह से उनके मार्जिन पर असर पड़ रहा है। एयर इंडिया पिछले 10 महीनों से 500 विमानों की खरीद के लिए बात कर रही है। माना जा रहा है इसी महीने इसकी घोषणा हो सकती है। 

जानकारों का कहना है कि एयर इंडिया मैनेजमेंट ने एयरबस के साथ डील पर काम पूरा कर लिया है लेकिन अभी इसे अंतिम रूप नहीं दिया गया है। महामारी के बाद एयरलाइन इंडस्ट्री में अच्छी रिकवरी हो रही है। एयर इंडिया इसका पूरा फायदा उठाना चाहती है। यही वजह है कि कंपनी बड़ी संख्या में विमान खरीद रही है। 

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