अरबपति की बेटी 9 साल की देवांशी बनी सन्यासी, 5 भाषाओं की है जानकारी 

मुंबई- जिस उम्र में बच्चे खेलते-कूदते हैं, मस्ती करते हैं, टीवी देखते हैं और खूब चटकारे लेकर अपनी पसंद का खाना खाते हैं, उस उम्र में देवांशी ने संन्यास ले लिया। सुनने में भले ही आपको अजीब लग रहा हो, लेकिन बात बिल्कुल सच है। देश के बड़े हीरा कारोबारी की 9 साल की बेटी सबकुछ छोड़कर संन्यासी बन गई है। दुनिया की मोहमाया से दूर हो गई है। जिसने भी ये सुना दंग रह गया।  

देवांशी के पिता करोड़ों की संपत्ति के मालिक है। उनके पिता धनेश सांघवी दुनिया की सबसे पुरानी हीरा कंपनी के मालिक है। धनेश सांघवी सांघवी एंड संस कंपनी के फाउंडर महेश सांघवी के एकलौते बेटे है। इस हीरा कंपनी की शाखाएं देश के कई हिस्सों के अलावा दुनिया के कई देशों में है। करोड़ों में कंपनी का टर्नओवर है। देवांशी उनकी बड़ी बेटी है। कंपनी की जिम्मेदारी उसे ही मिलने वाली थी, लेकिन संपत्ति का मोह छोड़कर वो संन्यासिनी बन गई। करोड़ों की संपत्ति होने के बाद भी हीरा कारोबारी का परिवार सामान्य जीवन जीता है। 

देवांशी ने धार्मिक शिक्षा में महारथ हासिल कर ली। धार्मिक शिक्षा पर आधारित क्विज में उसने गोल्ड मडल जीता। हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, मारवाड़ी और गुजराती भाषाओं में उसने महारथ हासिल कर ली। धर्म के अलावा उसने संगीत, भरतनाट्यम और योगा सीखा। परिवारवालों के मुताबिक देवांशी ने आज तक कभी टीवी नहीं देखा। 

14 जनवरी से ही देवांशी की दीक्षा की शुरूआत हो गई थी। बीते बुधवार को 35000 लोगों की मौजूदगी में उसने जैन धर्म की दीक्षा स्वीकार कर दी। राजकुमारी की तरह रहने वाली देवांशी ने सधारण कपड़े पहनें, बाल मुंडवाए। इस दीक्षा समारोह में 4 हाथी, 11 ऊंट और 20 घोड़े शामिल किए गए थे।  

देवांशी को बचपन से ही धर्म, आध्यात्म में रूचि थी। उसने 9 साल की उम्र तक 357 दीक्षा ली ली थी। 500 किमी पैदल यात्रा कर जैन धर्म के रिवाजों में शामिल हुई। देवांशी देश के जाने-माने हीरा कारोबारी धनेज सिंघवी की बेटी है। उनकी दो बेटियां है, जिसमें देवांशी बड़ी बेटी है।  

धनेज अपनी पुस्तैनी बिजनस को संभालते हैं। उनके पिता ने साल 1981 में उनके पिता मोहन भाई सिंघवी ने सिंघवी एंड संस डायमंड कंपनी की शुरुआत की। जिस कंपनी को मोहनभाई ने अपने खून पसीने से सींचा था, अब उसकी उत्तराधिकारी संन्यासी बन गई है। कंपनी का ऑपरेटिव इनकम साल 2001 में 300.1 करोड़ और साल 2021 में 304.4 करोड़ रहा। 

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