आरबीआई ने कहा, पुरानी पेंशन योजना लागू करना हो सकता है खतरनाक 

मुंबई- देश में कई राज्य सरकारें अपने यहां पुरानी पेंशन योजना लागू करने की प्लानिंग कर रही हैं। कुछ ने तो इसे लागू भी कर दिया है। लेकिन अब इन राज्यों की परेशानी बढ़ सकती है। आरबीआई ने सोमवार को पेंशन स्कीम पर वापस लोटने पर राज्य सरकारों को चेतावनी दी। आरबीआई ने सब-नेशनल फिस्कल होराइजन के लिए इसे बड़ा खतरा बताया है।  

आरबीआई (RBI) ने राज्यों से हेल्थ, एजुकेशन, इंफ्रा और ग्रीन एनर्जी पर उच्च पूंजीगत व्यय का आह्वान किया है। आरबीआई ने स्टेट फाइनेंस पर अपनी ताजा रिपोर्ट में पुरानी पेंशन योजना के बारे में कहा, ‘राजकोषीय संसाधनों में वार्षिक बचत जो इस कदम पर जोर देती है, वह अल्पकालिक है। वर्तमान के खर्चों को भविष्य के लिए स्थगित करके राज्य आने वाले वर्षों में अनफंडेड पेंशन देनदारियों का जोखिम उठा रहे हैं।’ 

हिमाचल प्रदेश, झारखंड, पंजाब, छत्तीसगढ़ और राजस्थान सहित कई विपक्ष शासित राज्यों ने ओल्ड पेंशन स्कीम में वापसी की घोषणा की है। जिसमें रिटायर्ड सरकारी कर्मचारियों को मासिक पेंशन के रूप में आखिरी वेतन का 50% देने का वादा किया गया है। 

यह कदम 2004 में मनमोहन सिंह सरकार द्वारा लागू की गई राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में बदलाव का संकेत देता है। इसमें सरकारी कर्मचारी वेतन का 10% योगदान करते हैं। नियोक्ता द्वारा भी एनपीएस में इतना ही योगदान दिया जाता है। मनमोहन सिंह के प्रमुख सहयोगी मोंटेक सिंह अहलूवालिया सहित कई अर्थशास्त्रियों ने राज्यों के इस कदम की आलोचना की है। कई मामलों में पेंशन पर खर्च पहले से ही काफी अधिक है। 

रिपोर्ट में आरबीआई ने कहा कि राज्यों में राजकोषीय स्थिति में सुधार के साथ-साथ ऑफ-बजट उधारी, एक ऐसा मुद्दा है जिसे केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने राज्य सरकारों के साथ उठाया था। आरबीआई ने सुझाव दिया है कि राज्यों को उच्च पूंजीगत व्यय पर ध्यान देना चाहिए। आरबीआई ने कहा कि यह कम से कम दो वर्षों के लिए राज्य की जीडीपी को लाभ पहुंचाएगा। आरबीआई ने कैपेक्स बफर फंड की स्थापना का सुझाव दिया। जहां राजस्व प्रवाह मजबूत होने पर ‘अच्छे समय’ के दौरान पैसा अलग रखा जाता है, ताकि आर्थिक मंदी की अवधि के दौरान खर्च प्रभावित न हो। 

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