आर्थिक मंदी के कारण ज्यादातर सीईओ परिचालन लागत में कर रहे हैं कटौती 

मुंबई- अधिकांश भारतीय सीईओ बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों के बीच अपनी परिचालन लागत में कटौती करने की योजना बना रहे हैं। एक सर्वे से यह जानकारी पता चली है। हालांकि, साथ ही वे देश की आर्थिक संभावनाओं के बारे में आशावादी हैं।  

प्राइस वॉटरहाउस कूपर्स (PWC) द्वारा जारी सालाना वैश्विक सीईओ सर्वे के अनुसार कई कंपनियां अपने कर्मचारियों की संख्या या वेतन में कटौती करने की योजना नहीं बनाती हैं। दावोस में सोमवार से शुरू हुई विश्व आर्थिक मंच (WEF) की बैठक के पहले दिन यह सर्वे जारी किया गया। 

यह सर्वे अक्टूबर और नवंबर 2022 के बीच भारत के 68 सीईओ सहित 105 देशों और क्षेत्रों के 4,410 सीईओ के बीच आयोजित किया गया था। सर्वे से यह भी पता चला है कि 10 में से लगभग 4 सीईओ (40 फीसदी वैश्विक और 41 फीसदी भारतीय उत्तरदाताओं) को उम्मीद नहीं है कि उनकी कंपनियां 10 वर्षों में आर्थिक रूप से व्यवहार्य होंगी, यदि वे अपने मौजूदा पथ पर जारी रहती हैं। 

सर्वे में कहा गया कि मौजूदा माहौल के जवाब में भारत के 93 फीसदी सीईओ (वैश्विक सीईओ के 85 फीसदी और एशिया प्रशांत सीईओ के 81 फीसदी के मुकाबले) कहते हैं कि वे परिचालन लागत को कम करने की योजना बना रहे हैं। साथ ही भारत के 78 फीसदी सीईओ, वैश्विक सीईओ के 73 फीसदी और एशिया पैसिफिक के 69 फीसदी सीईओ को लगता है कि अगले एक साल में वैश्विक आर्थिक विकास में गिरावट आएगी। 

हालांकि, सर्वे में पाया गया कि धूमिल वैश्विक आर्थिक परिदृश्य के बावजूद 57 फीसदी या 10 में से पांच भारतीय कॉरपोरेट अगले एक साल में भारत की आर्थिक वृद्धि के बारे में आशान्वित हैं, बावजूद इसके कि वैश्विक दृष्टिकोण निराशाजनक है। इसके विपरीत एशिया पैसिफिक के केवल 37 फीसदी सीईओ और 29 फीसदी वैश्विक सीईओ अगले 12 महीनों में अपने देशों या क्षेत्रों में आर्थिक विकास में सुधार की उम्मीद करते हैं। 

भारत के 67 फीसदी सीईओ ने कहा कि वे अस्थिर भू-राजनीतिक परिदृश्य के कारण अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं को समायोजित कर रहे हैं। जबकि उनमें से 59 फीसदी ने सूचित किया कि वे उत्पादों और सेवाओं में विविधता ला रहे हैं। सर्वे में यह भी पाया गया कि 50 प्रतिशत भारतीय सीईओ साइबर सुरक्षा और डेटा गोपनीयता में निवेश बढ़ा रहे हैं। 

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