वित्तवर्ष 2024 में 50,000 करोड़ तक का विनिवेश लक्ष्य रख सकती है सरकार 

मुंबई- सरकार अगले वित्त वर्ष यानी 2023-24 में 40,000-50,000 करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रख सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि ब्याज दरें ऊपर हैं। वैश्विक स्तर पर आर्थिक स्थितियां अच्छी नहीं हैं। आगे कई देश मंदी में जा सकते हैं। साथ ही अभी निवेशक बहुत सावधानी बरत रहे हैं। ऐसे में सरकार के लिए पूंजी जुटाना मुश्किल हो सकता है। 

बैंक ऑफ बड़ौदा की एक रिपोर्ट के अनुसार, जब से उदारीकरण की शुरुआत हुई है यानी वित्त वर्ष 1992 से लेकर अब तक केवल 8 बार ही सरकार विनिवेश के लक्ष्य को पूरा कर पाई है। 9 बार उसने लक्ष्य की तुलना में केवल 50 फीसदी रकम मिली है। पिछले 30 वर्षों में कुल 12.17 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश का लक्ष्य रखा गया, जबकि इसके एवज में केवल 7.28 लाख करोड़ रुपये ही मिल पाए। 

वित्त वर्ष 2018, 2019 और 2022 ऐसे साल रहे हैं जिसमें कुछ बड़ी कंपनियों ने ज्यादा रकम जुटाई है। इसमें 2018 में एनटीपी और जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन (जीआईसी) ने और 2019 में भारत 22 ईटीएफ और कोल इंडिया ने ज्यादा रकम जुटाई। 2022 में एक्सिस बैंक में सूटी का हिस्सा बेचने और एन्एमडीसी के साथ एअर इंडिया का विनिवेश रहा है। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि चालू वित्त वर्ष में 65,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य से 25 हजार करोड़ कम रकम मिलने की उम्मीद है। अप्रैल से नवंबर तक कुल 28,429 करोड़ रुपये जुटाए गए। सरकार प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ), फॉलोऑन पब्लिक ऑफर (एफपीओ), ऑफर फॉर सेल (ओएफएस), एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ), बायबैक, रणनीतिक बिक्री आदि से रकम जुटाती है। 

वित्त वर्ष 1992 से लेकर 2000 के बीच ज्यादा रकम रणनीतिक बिक्री और आईपीओ से जुटाए गए। उसके बाद 2000 से 2014 के बीच सीपीएसई की बिक्री, ईटीएफ और बायबैक से ज्यादा रकम जुटाई गई। वित्त वर्ष 2020 से अब तक ज्यादा रकम आईपीओ से जुटाई गई है। 

एसबीआई की मंगलवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024 में देश का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 300 लाख करोड़ का हो सकता है। वित्त वर्ष 2023 में इसका अनुमान 273 लाख करोड़ रुपये का है जबकि इसी दौरान बजट अनुमान में यह 258 लाख करोड़ रुपये लगाया गया है। यानी एसबीआई के अनुमान में सालाना आधार पर वित्त वर्ष 2024 में इसमें 9.8 फीसदी की बढ़त होगी। 

रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2024 में सरकार की प्राप्तियां 28 लाख करोड़ रुपये होगी जो चालू वित्त वर्ष के लिए बजट अनुमान में 22.8 लाख करोड़ रुपये है। हालांकि एसबीआई का अनुमान इसी साल में 25 लाख करोड़ रुपये है। यानी एसबीआई के अनुमान से इसमें 12.1 फीसदी की बढ़त होगी। 

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2023 में 39.4 लाख करोड़ रुपये का खर्च का अनुमान बजट में लगाया गया था पर एसबीआई का कहना है कि यह 42.5 लाख करोड़ हो सकता है और वित्त वर्ष 2024 में यह 8.2 फीसदी बढ़कर 46 लाख करोड़ रुपये हो सकता है। इसी दौरान राजकोषीय घाटा 6.4 फीसदी से कम होकर 6 फीसदी पर आ सकता है जो 17.95 लाख कऱोड़ रहेगा। 

एसबीआई के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में सरकार को बजट अनुमान से 2.3 लाख करोड़ रुपये ज्यादा मिलने कीउम्मीद है। इसमें जीएसटी से 95 हजार करोड़ और प्रत्यक्ष कर से 2.2 लाख करोड़ रुपये ज्यादा मिल सकता है। जबकि ज्यादा सब्सिडी और खर्च की वजह से खर्च बजट अनुमान से तीन लाख करोड़ ज्यादा रहने का अनुमान है। 

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