निर्यात में प्रतिस्पर्धा के लिए इलेक्ट्रिकल उद्योग को वैश्विक मानक बनाने की मांग

मुंबई- भारतीय विद्युत उद्योग के विशेषज्ञों ने देश के विद्युत उत्पादों को वैश्विक मानकों का पालन करने के लिए भारत सरकार पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यह सही समय है जब सरकार को गंभीर होने और उत्पाद की गुणवत्ता और प्रदर्शन के मामले में कठोर निर्णय लेना चाहिए। इस उद्योग को वैश्विक मानक के बराबर लाने की जरूरत है। 

उद्योग का मानना है कि खराब गुणवत्ता लोगों के जीवन को खतरे में डाल दिया है क्योंकि विद्युत सुरक्षा मानदंडों में बहुत कम सुधार हुआ है। नेशनल फायर प्रोटेक्शन एसोसिएशन के अनुसार, बिजली के झटके और ज्यादातर आग टूटे हुए बिजली के उपकरणों से होती है। इलेक्ट्रकिल उद्योग में काम करने वाले सलाहकार अजीत कुलकर्णी ने कहा कि इस तरह की घटनाएं इलेक्ट्रिकल गलतियों से होती हैं। इसके लिए सुरक्षा की जरूरत है। 

भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) अंतिम उपयोगकर्ता की सुरक्षा के लिए एजेंडा बिल्कुल भी निर्धारित नहीं करता है। हर घर में उपयोग होने वाले साधारण तारों के मामले में बीआईएस अभी भी केवल पीवीसी इंसुलेटेड तारों को अनिवार्य करता है जो केवल 70 डिग्री सेल्सियस तापमान का सामना कर सकते हैं।  

भारत के कुछ हिस्सों में तापमान 50 डिग्री को छू जाता है, यह आग के खतरे की स्थिति पैदा करता है। साथ ही यह पीवीसी इंसुलेशन जहरीला धुआं भी छोड़ता है जो दृश्यता को शून्य तक कम कर देता है और इस धुएं में सांस लेने वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य को खराब करता है। भारतीय उत्पाद विश्व स्तर की बराबरी के होते तो ऐसे खतरे टल सकते हैं। साथ ही विदेशी मुद्रा की बचत करने वाले महत्वपूर्ण घटकों के आयात को कम किया जा सकेगा। 

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